चंद्रबाबू नायडू का यू-टर्न: आंध्र प्रदेश में 3 और 4 बच्चे पैदा करने पर क्यों मिल रहे हैं हजारों रुपये? जानें असली वजह
अमरावती/श्रीकाकुलम:चंद्रबाबू नायडू का यू-टर्न: आंध्र प्रदेश में 3 और 4 बच्चे पैदा करने पर क्यों मिल रहे हैं हजारों रुपये? जानें असली वजह। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राज्य में लगातार घटती जनसंख्या दर (प्रजनन दर) को रोकने और युवाओं की आबादी को संतुलित बनाए रखने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक नीतिगत ऐलान किया है। श्रीकाकुलम जिले के नरसन्नापेटा में आयोजित ‘स्वर्णआंध्र-स्वच्छआंध्र’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य में अब तीसरे बच्चे के जन्म पर परिवार को 30 हजार रुपये और चौथे बच्चे के जन्म पर 40 हजार रुपये की वित्तीय प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
ट्रेनों में सफर के दौरान बढ़ रहीं ‘हेल्थ इमरजेंसी’: रेलवे की 139 हेल्पलाइन पर शिकायतों में 20% का उछाल; पढ़ें डॉक्टरों की जरूरी सलाह
चंद्रबाबू नायडू का यू-टर्न: आंध्र प्रदेश में 3 और 4 बच्चे पैदा करने पर क्यों मिल रहे हैं हजारों रुपये? जानें असली वजह
सरकार अगले एक महीने के भीतर इस अनूठी योजना का विस्तृत खाका (नियम और शर्तें) आधिकारिक तौर पर जारी कर देगी।
स्वच्छता कार्यक्रम के मंच से मुख्यमंत्री का सीधा संवाद
सार्वजनिक मंच से जनता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने सीधे तौर पर इस नए फैसले पर जनता की राय मांगी। उन्होंने कहा:
“मैंने राज्य के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह नया फैसला लिया है। अब तीसरे बच्चे के जन्म पर 30 हजार रुपये और चौथे बच्चे पर 40 हजार रुपये दिए जाएंगे। क्या यह सही फैसला नहीं है? समाज को आगे बढ़ाने के लिए हमें जन्म दर को संतुलित करना ही होगा।”
यू-टर्न: पहले जनसंख्या नियंत्रण, अब वृद्धि की वकालत
मुख्यमंत्री नायडू का यह रुख बेहद दिलचस्प और ध्यान खींचने वाला है। अतीत में वे देश में तेजी से बढ़ती आबादी को रोकने और जनसंख्या नियंत्रण कानूनों के सबसे बड़े समर्थकों में गिने जाते थे। हालाँकि, बदलते जनसांख्यिकीय (Demographic) संकट को देखते हुए उन्होंने अपनी सोच बदली है। नायडू ने स्पष्ट किया कि समय बदल चुका है और अब दक्षिण भारत के राज्यों को अपनी जन्म दर बढ़ाने की दिशा में मिलकर काम करना होगा।
योजना की पृष्ठभूमि: पहले ₹25,000 पर चल रहा था विचार
इस वर्ष 5 मार्च को विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने संकेत दिए थे कि सरकार दूसरे बच्चे के जन्म पर 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की योजना बना रही है। लेकिन बाद में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सत्या कुमार यादव ने स्पष्ट किया कि सरकार ने अपनी रणनीति का दायरा बढ़ाते हुए अब तीसरे और उससे अधिक बच्चों वाले परिवारों को भी इस वित्तीय प्रोत्साहन के दायरे में लाने का अंतिम निर्णय ले लिया है।
क्यों चिंता में हैं मुख्यमंत्री? समझिए इसके पीछे का गणित
मुख्यमंत्री ने जनसांख्यिकी के गिरते स्तर पर गहरी चिंता जताते हुए इसके पीछे दो मुख्य सामाजिक कारण और वैश्विक खतरे बताए:
-
बदलती जीवनशैली और सोच: नायडू ने कहा कि आय और आर्थिक संपन्नता बढ़ने के साथ ही आजकल कई शिक्षित दंपति केवल ‘एक बच्चा’ पैदा करने का फैसला कर रहे हैं। वहीं, कुछ पारंपरिक परिवार तब तक दूसरा बच्चा प्लान नहीं करते जब तक कि उन्हें पहला बेटा न मिल जाए। इन दोनों प्रवृत्तियों के कारण आंध्र प्रदेश की जनसंख्या वृद्धि दर लगातार रसातल में जा रही है।
-
2.1 की प्रजनन दर (TFR) का संकट: उन्होंने तकनीकी तौर पर समझाया कि किसी भी जीवंत समाज की आबादी को स्थिर और युवा बनाए रखने के लिए कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate) 2.1 होना अनिवार्य है। यानी औसतन हर महिला के दो से अधिक बच्चे होने चाहिए, लेकिन आंध्र प्रदेश इस आंकड़े से काफी नीचे खिसक रहा है।
-
बुजुर्ग होती आबादी का आर्थिक खतरा: मुख्यमंत्री ने वैश्विक उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि दुनिया के कई विकसित देशों (जैसे जापान, चीन और कुछ यूरोपीय देशों) में घटती आबादी और बुजुर्गों की बढ़ती संख्या ने वहां की पूरी अर्थव्यवस्था और वर्कफोर्स को भारी नुकसान पहुंचाया है। वे नहीं चाहते कि आंध्र प्रदेश और दक्षिण भारत के राज्य भविष्य में ऐसे किसी आर्थिक और सामाजिक संकट का सामना करें।

