BREAKING: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पूरी को भाजपा ने बनाया राज्यसभा उम्मीदवार

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नई दिल्ली / भोपाल: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेतृत्व ने मोदी सरकार में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पूरी (Hardeep Singh Puri) को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है। इससे पूर्व वे उत्तर प्रदेश राज्य से राज्यसभा सांसद के रूप में संसद का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

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भाजपा का यह फैसला उनके विशाल प्रशासनिक अनुभव और केंद्र सरकार में उनकी प्रभावी भूमिका को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक और कूटनीतिक पृष्ठभूमि

हरदीप सिंह पूरी का सफर राजनीति से पहले एक उत्कृष्ट नौकरशाह (Diplomat) के रूप में शुरू हुआ था।

  • पूर्व IFS अधिकारी: वे 1974 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी रहे हैं।

  • संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व: उन्होंने 2009 से 2013 तक संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि (Permanent Representative) के रूप में कार्य किया और 2011 व 2012 में यूएन सुरक्षा परिषद (UNSC) की अध्यक्षता भी संभाली।

  • भाजपा में शामिल होना: वर्ष 2014 के शुरुआती दिनों में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और पार्टी के लिए नीतिगत मामलों में सक्रिय भूमिका निभाने लगे।

मोदी सरकार में मंत्रालय और जिम्मेदारी

हरदीप सिंह पूरी ने मोदी मंत्रिमंडल में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली है:

  • आवास एवं शहरी कार्य मंत्री (Housing and Urban Affairs): स्मार्ट सिटी मिशन, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) और पीएम आवास योजना जैसी प्रमुख योजनाओं के क्रियान्वयन में इनकी बड़ी भूमिका रही।
  • नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री (독립 प्रभार): नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में अवसंरचना और नीतिगत सुधारों को आगे बढ़ाया।

  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री: वर्तमान में वे देश के ऊर्जा क्षेत्र, एथेनॉल ब्लेंडिंग (E20 व E85 नीतियों) और वैश्विक तेल बाजारों के उतार-चढ़ाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने का कार्य देख रहे हैं।

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राज्यसभा में प्रतिनिधित्व का महत्व

संसदीय व्यवस्था में केंद्रीय मंत्री पद पर बने रहने के लिए संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) का सदस्य होना आवश्यक होता है। विधानसभा में भाजपा के पास बहुमत होने के कारण उनका निर्विरोध या बड़े अंतर से राज्यसभा पहुंचना तय माना जा रहा है।

भाजपा नेतृत्व का यह कदम यह दर्शाता है कि पार्टी उनके कूटनीतिक अनुभव, नीतिगत दक्षता और कैबिनेट में ऊर्जा प्रबंधन की भूमिका को निरंतर बनाए रखना चाहती है।