Breking news -ट्रेन की बोगी में मिली दो माह की मासूम, अपनाने के लिए उमड़ीं कई माताएं,कटनी मुड़वारा स्टेशन पर मिली बच्ची जिला अस्पताल पहुंची, स्वस्थ मिलने के बाद किलकारी चाइल्ड हेल्पलाइन को सौंप
कटनी। कटनी मुड़वारा रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार सुबह एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने ममता और इंसानियत से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए। बीना-मालखेड़ी एक्सप्रेस की बोगी में दो माह की एक मासूम बच्ची लावारिस हालत में मिली। जिस उम्र में बच्ची को मां की गोद और परिवार के संरक्षण की सबसे अधिक जरूरत होती है, उस उम्र में उसका अकेले मिलना हर किसी को भावुक कर गया। वहीं, बच्ची के जिला अस्पताल पहुंचने की खबर फैलते ही उसे देखने और अपनाने की इच्छा लेकर कई महिलाएं अस्पताल पहुंच गईं।
जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 7:25 बजे ट्रेन क्रमांक 1934 के कटनी मुड़वारा स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-4 पर पहुंचने के दौरान बोगी में बच्ची मिलने की सूचना सामने आई। जानकारी मिलते ही आरपीएफ आरक्षक गणेश और जीआरपी आरक्षक धर्मेंद्र चौकसे ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया। इसके बाद बच्ची को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच में बच्ची स्वस्थ पाई गई।
कुछ समय तक जिला अस्पताल में देखरेख के बाद बच्ची को किलकारी चाइल्ड हेल्पलाइन संस्था भेज दिया गया, जहां उसकी देखभाल की व्यवस्था की गई है।
बच्ची को अपनाने के लिए आगे आईं महिलाएं
इस घटना का सबसे भावुक पहलू उस समय सामने आया, जब बच्ची के अस्पताल में होने की जानकारी लोगों तक पहुंची। कई महिलाएं उसे देखने के लिए जिला अस्पताल पहुंचीं। इनमें कुछ महिलाएं ऐसी भी थीं, जिन्होंने बच्ची को अपनी गोद में लेकर पालने और उसे परिवार का हिस्सा बनाने की इच्छा जाहिर की।
एक अनजान बच्ची के प्रति महिलाओं का यह स्नेह अस्पताल में मौजूद लोगों को भावुक कर गया। बच्ची से किसी का खून का रिश्ता नहीं था, फिर भी उसे अपनाने की चाह ने यह दिखाया कि ममता का रिश्ता केवल जन्म देने तक सीमित नहीं होता। किसी असहाय बच्चे को सुरक्षा, प्यार और बेहतर भविष्य देने की इच्छा भी संवेदना का महत्वपूर्ण रूप है।
आखिर किस मजबूरी में छोड़ी गई मासूम?
दो माह की बच्ची को ट्रेन की बोगी में किसने और किन परिस्थितियों में छोड़ा, फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं हुई है। इस संबंध में वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। इतनी छोटी उम्र में बच्ची का अकेला मिलना उसकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
हालांकि, बच्ची को गोद लेने की इच्छा जताने वाली महिलाओं की भावनाएं अपनी जगह हैं, लेकिन उसे गोद देने की प्रक्रिया बाल संरक्षण से जुड़े कानूनों और निर्धारित नियमों के अनुसार ही पूरी की जाएगी। बच्ची के भविष्य से संबंधित निर्णय सक्षम बाल संरक्षण प्राधिकारियों की प्रक्रिया के तहत लिया जाएगा।
फिलहाल मासूम स्वस्थ है और उसकी देखरेख की व्यवस्था कर दी गई है। अब उम्मीद है कि उसे सुरक्षित वातावरण, पर्याप्त देखभाल और ऐसा परिवार मिल सकेगा, जहां उसका बचपन प्यार और संरक्षण के बीच बीते।
कटनी मुड़वारा स्टेशन की यह घटना एक ओर यह सवाल छोड़ गई है कि आखिर मासूम को अकेला क्यों छोड़ा गया, तो दूसरी ओर अस्पताल पहुंचीं महिलाओं की संवेदनशीलता ने यह भरोसा भी जगाया कि मुश्किल हालात में भी इंसानियत और ममता जिंदा हैं।




















