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रीवा: ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ में बड़ा घोटाला- चंदेरी झील के गहरीकरण के नाम पर कोपरा का अवैध उत्खनन; पूर्व खनिज अधिकारी का बेटा और सरपंच पति कटघरे में

रीवा: 'जल गंगा संवर्धन अभियान' में बड़ा घोटाला- चंदेरी झील के गहरीकरण के नाम पर कोपरा का अवैध उत्खनन; पूर्व खनिज अधिकारी का बेटा और सरपंच पति कटघरे में

रीवा: ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ में बड़ा घोटाला- चंदेरी झील के गहरीकरण के नाम पर कोपरा का अवैध उत्खनन; पूर्व खनिज अधिकारी का बेटा और सरपंच पति कटघरे में

रीवा: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए चलाए जा रहे महत्वाकांक्षी ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ में रीवा जिले से भ्रष्टाचार और अवैध उत्खनन का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। जिले की हुजूर तहसील के अंतर्गत आने वाली कुठार पंचायत की चंदेरी झील में गहरीकरण के नाम पर सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। आरोप है कि यहाँ तालाब को गहरा करने के बहाने पहले साधारण मिट्टी निकाली गई और फिर उसकी आड़ में बिना किसी विधिक अनुमति के करोड़ों रुपये की कीमत का कीमती कोपरा (मुरमयुक्त खनिज) खोदकर खुले बाजार में बेच दिया गया।

इस पूरे अवैध कारोबार में पंचायत के रसूखदारों और पूर्व सरकारी अधिकारियों के परिजनों का एक कड़ा गठजोड़ (Nexus) सामने आया है।

15 दिनों में 150 डंपर पार; पूर्व खनिज अधिकारी के बेटे पर गंभीर आरोप

ग्रामीणों द्वारा जिला प्रशासन और विधिक अधिकारियों से की गई लिखित शिकायत के अनुसार, चंदेरी झील की खुदाई का यह पूरा खेल बेहद सोची-समझी रणनीति के तहत खेला जा रहा था:

  • सरपंच पति की भूमिका: कुठार पंचायत की महिला सरपंच के पति गिरजेश ने नियमों को ताक पर रखकर इस झील की खुदाई का ठेका किसी विधिक निर्माण एजेंसी के बजाय एक रसूखदार को सौंप दिया।

  • पूर्व अधिकारी का कनेक्शन: यह काम रीवा के ही एक सेवानिवृत्त (Retired) खनिज अधिकारी एल.एम. गोयल के बेटे शुभम गोयल को दिया गया था।

  • रॉयल्टी की भारी चोरी: ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले 15 दिनों से यहाँ दिन-रात हैवी पोकलेन और जेसीबी मशीनें चल रही थीं। इस दौरान बिना किसी विधिक रॉयल्टी (Royalty) और बिना सरकारी अनुमति के करीब 150 डंपर से ज्यादा कोपरा निकालकर बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया गया, जिससे राजस्व को भारी नुकसान हुआ है।

 सरकारी अभियान बना ‘माफिया’ के लिए वरदान!

मध्य प्रदेश में इस वक्त जल संरक्षण के लिए ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत तालाबों, कुओं और झीलों के गहरीकरण का जिम्मा ग्राम पंचायतों को सौंपा गया है ताकि ग्रामीण इलाकों में जलस्तर (Water Table) सुधारा जा सके। लेकिन हुजूर तहसील में इस पवित्र अभियान को ही खनिज दोहन का जरिया बना लिया गया।

जमीनी हकीकत: चंदेरी झील में विधिक गहराई से कहीं अधिक कड़ा उत्खनन कर कोपरा निकाला गया, जिससे झील के प्राकृतिक जल विन्यास को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। ग्रामीणों के भारी विरोध और शिकायत के बाद अब यह मामला तूल पकड़ चुका है।

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