मध्य पूर्व में तनाव से कच्चे तेल के बाजार में उबाल: $100 के करीब पहुँचा ब्रेंट क्रूड, भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा
मध्य पूर्व में तनाव से कच्चे तेल के बाजार में उबाल: $100 के करीब पहुँचा ब्रेंट क्रूड, भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा

मध्य पूर्व में तनाव से कच्चे तेल के बाजार में उबाल: $100 के करीब पहुँचा ब्रेंट क्रूड, भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा
नई दिल्ली: मध्य पूर्व (Middle East) में एक बार फिर बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध के नए इलाकों में फैलने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया है। वैश्विक बाजार में कच्चा तेल (Brent Crude) तेजी से उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े के करीब पहुँच गया है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात जल्द नियंत्रित नहीं हुए, तो तेल की कीमतें 100 डॉलर के स्तर को पार कर सकती हैं, जिसका सीधा और गंभीर असर भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।
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आखिर क्यों अचानक लग रही है कच्चे तेल में आग?
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सप्लाई बाधित होने का डर: मध्य पूर्व दुनिया के सबसे प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। हालिया हमलों के बाद निवेशकों को डर है कि यदि युद्ध बढ़ता है या समुद्री व्यापारिक मार्ग बाधित होते हैं, तो वैश्विक आपूर्ति ठप पड़ सकती है।
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बाजार में डर का माहौल: आपूर्ति संकट की आशंका के चलते निवेशक अब सुरक्षित विकल्पों (Safe Havens) की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे तेल की कीमतों में यह तेज उछाल आया है।
भारत पर क्या पड़ेगा इसका सीधा प्रभाव?
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 85% हिस्सा विदेशों से आयात (Import) करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से:
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पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस महंगी: ईंधन की लागत बढ़ने से आम जनता की जेब पर सीधा बोझ पड़ेगा।
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महंगाई (Inflation) में बढ़ोतरी: परिवहन और माल ढुलाई (Logistics) महंगी होने से फल, सब्जियां और रोजमर्रा की सभी चीजें महंगी हो सकती हैं।
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अर्थव्यवस्था पर दबाव: देश का आयात बिल बढ़ेगा, जिससे चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) पर विपरीत असर पड़ सकता है।
शेयर बाजार और अन्य उद्योगों पर भी संकट के बादल
ऊंची ऊर्जा लागत का असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर शेयर बाजार, एयरलाइंस, लॉजिस्टिक्स, केमिकल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी दिखेगा। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि तेल उत्पादक देश और वैश्विक एजेंसियां इस स्थिति से निपटने के लिए क्या कदम उठाती हैं।








