Friday, May 15, 2026
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CGHS नियमों में बड़ा फेरबदल: अब मुफ्त इलाज के लिए माता-पिता या सास-ससुर में से कि‍सी एक चुनना होगा, दोबारा नहीं मिलेगा मौका

CGHS नियमों में बड़ा फेरबदल: अब मुफ्त इलाज के लिए माता-पिता या सास-ससुर में से कि‍सी एक चुनना होगा, दोबारा नहीं मिलेगा मौका। केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारी स्वास्थ्य योजना (CGHS) के नियमों में एक बड़ा संशोधन किया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 13 मई 2026 को जारी नए मेमोरेंडम के अनुसार, अब सरकारी कर्मचारियों को अपने आश्रितों (Dependents) के चुनाव को लेकर बेहद सावधानी बरतनी होगी। नए नियमों के तहत मुफ्त मेडिकल सुविधा के लिए कर्मचारी को अपने माता-पिता या सास-ससुर में से किसी एक ही पक्ष को चुनना होगा।

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CGHS नियमों में बड़ा फेरबदल: अब मुफ्त इलाज के लिए माता-पिता या सास-ससुर में से कि‍सी एक चुनना होगा, दोबारा नहीं मिलेगा मौका

फैसले का मिलेगा सिर्फ एक मौका (One-Time Option)

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यह चुनाव कर्मचारी के पूरे सेवाकाल में केवल एक बार किया जा सकेगा। यदि किसी कर्मचारी ने अपने माता-पिता को CGHS कार्ड में शामिल कर लिया है, तो वह भविष्य में इसे बदलकर सास-ससुर के नाम पर नहीं कर सकता। मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि माता-पिता के निधन जैसी स्थिति में भी इस विकल्प को बदलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह नियम महिला और पुरुष दोनों कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगा।

वेतन के आधार पर मासिक योगदान

CGHS का लाभ लेने के लिए कर्मचारियों के वेतन (7th CPC पे-मैट्रिक्स) से हर महीने एक निश्चित प्रीमियम काटा जाता है:

  • लेवल 1 से 5: ₹250 प्रति माह

  • लेवल 6: ₹450 प्रति माह

  • लेवल 7 से 11: ₹650 प्रति माह

  • लेवल 12 और ऊपर: ₹1,000 प्रति माह

किसे माना जाएगा ‘आश्रित परिवार’?

योजना के तहत ‘परिवार’ की परिभाषा को भी स्पष्ट किया गया है। इसमें पति/पत्नी के अलावा कर्मचारी पर पूरी तरह निर्भर रहने वाले सदस्य शामिल हैं:

  • बच्चे: बेटा 25 वर्ष की आयु या शादी (जो भी पहले हो) तक। बेटी शादी होने तक।

  • अन्य सदस्य: नाबालिग भाई-बहन, विधवा बहनें, तलाकशुदा बेटियां और उनके नाबालिग बच्चे।

  • शर्त: इन सदस्यों का कर्मचारी के साथ रहना और उन पर आर्थिक रूप से निर्भर होना अनिवार्य है।

पेंशनभोगियों के लिए विशेष सुविधा

रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए सरकार ने लचीले विकल्प रखे हैं। गैर-CGHS क्षेत्रों में रहने वाले पेंशनर्स चाहें तो हर महीने फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) ले सकते हैं या फिर पास के किसी CGHS शहर में रजिस्ट्रेशन कराकर इलाज की सुविधा पा सकते हैं। इसके अलावा, पेंशनर ओपीडी (OPD) के लिए नकद भत्ता और अस्पताल में भर्ती होने (IPD) के लिए CGHS कार्ड का ‘हाइब्रिड’ विकल्प भी चुन सकते हैं।

Usha Pamnani

20 वर्षों से डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता में देश-विदेश, फ़िल्म, खेल सहित सामाजिक खबरों की एक्सपर्ट, वर्तमान में यशभारत डॉट कॉम में वरिष्ठ जिला प्रतिनिधि