Friday, May 15, 2026
Latest:
Latest

Bhopal News: कांग्रेस नेती पीसी शर्मा और समर्थकों से विवाद के बाद डॉक्टर का इस्तीफा

Bhopal Political Helth Update: भोपाल। कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा व उनके समर्थकों और जेपी अस्पताल के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. योगेन्द्र श्रीवास्तव के बीच विवाद के बाद डॉ. श्रीवास्तव ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने लिखा है पूरी गंभीरता से इलाज करने के बाद भी कुछ लोगों ने दुर्व्यवहार किया है।

लिहाजा ब्यथित होकर इस्तीफ दे रहे हैं। कोलार के रहने वाले 35 साल के तखत सिंह शाक्य के इलाज मेंे बारे में पूछने के लिए पीसी शर्मा ने सिविल सर्जन डॉ. राकेश श्रीवास्तव और डॉ. योगेन्द्र श्रीवास्तव को फोन लगाया था। डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने फोन नहीं उठाया और डॉ. योगेन्द्र समेत दो डॉक्टरों ने बात करने से मना कर दिया तो पीसी शर्मा अपने समर्थकों के साथ जेपी अस्पताल पहुुंचे थे। इस बीच मरीज की मौत भी हो गई।

तखत सिंह को सांस फूलने की समस्या होेने पर शनिवार दोपहर 12 बजेे के करीब जेपी अस्पताल लाया गया था। यहां कोरोना की रैपिड जांच रिपोर्ट निगेटिव होने पर उन्हें इमरजेंसी में भर्ती किया था।

तखत सिंह की पत्नी मंजू शाक्य ने बताया कि इमरजेंसी में इलाज कर रही महिला चिकित्सक ने कहा था कि अस्पताल में गंभीर मरीजों को भर्ती करने के लिए आइसीयू में जगह नहीं है इसलिए कहीं और ले जाएं। डॉ. योगेन्द्र श्रीवास्तव ने भी यही कहा था।

मंजू ने आरोप लगाया कि तीन बजे के करीब डॉक्टर ने ऑक्सीजन निकालकर निजी अस्पताल ले जाने को कहा था, इसके 10 मिनट बाद ही उनकी मौत हो गई।

विवाद के वायरल वीडियों में बातचीत के अंश

पीसी शर्मा- बात क्यों नहीं कर रहे थे।

डॉक्टर- काम में व्यस्त था।

पीसी श्ार्मा-आप बात हमसे नहीं करोगे तो किससे करोगे।

  • गुड्डू चौहान (कांग्रेस नेता)-बात क्यों नहीं की ऑपने। मजाक मना दिया है। मरीज की मौत हो गई, इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

परिजन को पहले ही बता दिया था कि मरीज की हालत गंभीर है। उसका करीब 10 दिन से एक प्राइवेट चिकित्सक डॉ. हक द्वारा इलाज किया जा रहा था। ऑक्सीजन का स्तर 36 फीसद तक पहंुच गया था। शुगर का स्तर 223 था। डॉक्टरों ने इलाज में कोई कमी नहीं की। साधारण्ा आसीयू में बिस्तर खाली हैं, इसलिए रेफर करने का सवाल ही नहीं था। घटना की सूचना स्वास्थ्य आयुक्त को दे दी है। डॉ. राकेश श्रीवास्तव, अधीक्षक, जेपी अस्पताल

मेरे साथ इतना दुर्व्यहार किया है कि मैं रो रहा हूं। बहुत व्यथित हूं । मैं गाली खाने के लिए पैदा नहीं हुआ हूं। ऐसे मैं काम नहीं कर पाऊंगा। मेरी कोई कोई गलती हो जितनी भी सजा दे लो, पर कोई गलती नहीं होने पर इस तरह से दुर्व्यवहार में मैं नौकरी नहीं कर पाउंगा। मरीज की 36 फीसद ऑक्सीजन था। ऐसे में डॉक्टर क्या भगवान भी नहीं बचा सकता था। डॉ. योगेन्द्र श्रीवास्तव , इस्तीफा देने वाले चिकित्सक

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम