भोपाल। महानगर का दर्जा पाने की ओर बढ़ रहे मध्य प्रदेश की राजधानी में भोपाल में फायर सिस्टम की बदहाली अब आम जनता की जान-माल के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। हाल ही में आईएसबीटी (ISBT) परिसर में खड़ी 8 बसों में लगी भीषण आग और न्यू मार्केट के व्यावसायिक क्षेत्र में हुए अग्निकांड ने नगर निगम के सुरक्षा दावों की हवा निकाल दी है। लगातार हो रहे इन हादसों ने यह साबित कर दिया है कि भोपाल में फायर सिस्टम की बदहाली के कारण आग लगने पर शुरुआती मिनटों में राहत पहुंचाना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।
तेजी से बढ़ती आबादी और गगनचुंबी इमारतों के बीच राजधानी का अग्निशमन विभाग आज भी सालों पुरानी व्यवस्था और संसाधनों की भारी कमी से जूझ रहा है।
45 में से केवल 20 दमकलें सक्षम: भोपाल में फायर सिस्टम की बदहाली की मुख्य वजह
अग्निशमन विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो भोपाल में फायर सिस्टम की बदहाली की असली वजह खटारा वाहन और कर्मचारियों का अकाल है:
- 54 साल पुरानी गाड़ियां: नगर निगम के बेड़े में शामिल 33 दमकल वाहनों में से 18 वाहन 20 से लेकर 54 साल तक पुराने हो चुके हैं।
- मानकों की अनदेखी: ‘नेशनल फायर एडवाइजरी’ के अनुसार दमकल गाड़ियों की उपयोगी अवधि 10 वर्ष होती है, लेकिन यहां आधी सदी पुरानी गाड़ियों से काम चलाया जा रहा है।
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20 गाड़ियां ही काम की: कुल 45 दमकल वाहनों में से केवल 20 वाहन ही बड़ी आग पर काबू पाने की स्थिति में हैं।
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स्टाफ की भारी कमी: शहर की सुरक्षा के लिए 800 से 1000 फायर कर्मियों की जरूरत है, जबकि केवल 350 कर्मचारी ही तैनात हैं।
11 में से सिर्फ 8 स्टेशन सक्रिय, जमीनों के फेर में अटके नए प्रोजेक्ट
शहर के 418 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और 28 लाख से अधिक आबादी की सुरक्षा के लिए नियमनुसार कम से कम 16 फायर स्टेशन होने चाहिए। लेकिन भोपाल में फायर सिस्टम की बदहाली का आलम यह है कि कागजों में दर्ज 11 स्टेशनों में से केवल 8 ही पूर्ण रूप से सक्रिय हैं।
वर्तमान सक्रिय फायर स्टेशन:
फतेहगढ़, पुल बोगदा, बैरागढ़, छोला, माता मंदिर, गोविंदपुरा, कोलार, आइएसबीटी, गांधी नगर, यूनानी सफाखाना और न्यू कबाड़खाना।
15 से 20 किमी की दूरी बनी मुसीबत:
फायर स्टेशनों की कमी के कारण दमकल गाड़ियों को 15 से 20 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ता है। ट्रैफिक जाम और लंबी दूरी के चलते दमकलें समय पर नहीं पहुंच पातीं, जिससे शुरुआती महत्वपूर्ण समय (Golden Hours) हाथ से निकल जाता है।
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अटके हुए नए स्टेशन:
आशिमा मॉल, पटेल नगर, चांदबड़ और नीलबड़ में नए फायर स्टेशन प्रस्तावित हैं, लेकिन जमीन उपलब्ध न होने से यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ी है।
VIP ड्यूटी और आयोजनों में व्यस्त रहते हैं अग्निशमन वाहन
राजधानी होने के कारण भोपाल में आए दिन मेले, राजनीतिक प्रदर्शन और वीआईपी मूवमेंट होते रहते हैं। सुरक्षा के नाम पर हर दिन 4 से 5 दमकल गाड़ियां इन्हीं आयोजनों में लगा दी जाती हैं।
रविवार को जब ISBT स्टैंड पर बसों में आग लगी, तब वहां तैनात गाड़ी एक मेले में ड्यूटी दे रही थी। आपात स्थिति में जब गाड़ी को वापस बुलाया गया, तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी। यह घटना स्पष्ट रूप से भोपाल में फायर सिस्टम की बदहाली को बयां करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ Section)
Q1. भोपाल में फायर सिस्टम की बदहाली का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: दमकल वाहनों का 20 से 54 साल पुराना होना, 800 की जगह केवल 350 कर्मचारियों का होना और पर्याप्त संख्या में सक्रिय फायर स्टेशनों का न होना भोपाल में फायर सिस्टम की बदहाली का मुख्य कारण है।
Q2. भोपाल की आबादी के हिसाब से कितने फायर स्टेशनों की जरूरत है?
उत्तर: 28 लाख की आबादी और 418 वर्ग किमी क्षेत्र के लिए कम से कम 16 फायर स्टेशनों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 8 स्टेशन ही पूर्ण रूप से सक्रिय हैं।
Q3. दमकल वाहनों की कार्यक्षमता (Life Span) कितनी मानी जाती है?
उत्तर: नेशनल फायर एडवाइजरी के मानकों के अनुसार किसी भी दमकल वाहन की उपयोगी अवधि केवल 10 वर्ष होती है।
निष्कर्ष
शहर का दायरा और आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन भोपाल में फायर सिस्टम की बदहाली को देखकर ऐसा लगता है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। यदि समय रहते नई दमकलों की खरीद, कर्मचारियों की भर्ती और नए स्टेशनों का निर्माण नहीं किया गया, तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं

