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तीन माह से भुगतान नहीं, आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं का फूटा आक्रोश; कलेक्ट्रेट पहुंचकर सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

तीन माह से भुगतान नहीं, आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं का फूटा आक्रोश; कलेक्ट्रेट पहुंचकर सरकार के खिलाफ खोला मोर्च

कटनी।लंबे समय से लंबित भुगतान और उपेक्षा से नाराज आशा एवं ऊषा कार्यकर्ताओं का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। मंगलवार को आशा ऊषा कार्यकर्ता महिला संगठन के बैनर तले बड़ी संख्या में कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचीं और प्रदेश सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ विरोध दर्ज कराते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

संगठन की जिला अध्यक्ष सुरेखा आरख के नेतृत्व में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि तीन माह से प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे हजारों आशा एवं ऊषा कार्यकर्ताओं के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना था कि शासन की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजनाओं को जमीनी स्तर पर सफल बनाने वाली कार्यकर्ताओं को ही उनके मेहनताने के लिए भटकना पड़ रहा है।

 

ज्ञापन के माध्यम से कार्यकर्ताओं ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाई गई राशि और पूर्व में घोषित वार्षिक वृद्धि का एरियर आज तक नहीं दिया गया है। कई बार मांग उठाने के बावजूद जिम्मेदार विभाग ध्यान नहीं दे रहा है, जिससे कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है।

विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने मांग की कि सभी बकाया प्रोत्साहन राशि का तत्काल भुगतान किया जाए, प्रत्येक माह नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा भुगतान संबंधी पारदर्शिता के लिए राशि की स्लिप उपलब्ध कराई जाए। साथ ही आशा एवं ऊषा कार्यकर्ताओं को 21 हजार रुपये मासिक मानदेय, एंड्रॉयड मोबाइल, रेस्ट रूम सुविधा और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने की भी मांग की गई।

कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा उन पर अनावश्यक दबाव बनाया जाता है, जबकि वे सीमित संसाधनों में लगातार स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। संगठन ने मांग की कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो और कार्यकर्ताओं के साथ न्याय किया जाए।

 

संगठन की पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया तो जिलेभर की आशा एवं ऊषा कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेंगी। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज कर रहा है, लेकिन अब कार्यकर्ता अपने अधिकारों के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।

इस दौरान बड़ी संख्या में आशा एवं ऊषा कार्यकर्ता उपस्थित रहीं और शासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग की

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