दूध बेचने वाले पंचम ने पेश की अनूठी मिसाल
मुड़हरा ग्राम निवासी पंचम यादव, जो पेशे से घर-घर जाकर दूध बेचने का काम करते हैं, उन्होंने कलेक्टर की इस पहल को सबसे पहले अपने घर में अपनाया। पंचम ने अपनी बिटिया को मोबाइल से QR कोड स्कैन कर अलग-अलग विषयों को पढ़ना सिखाया। जब बिटिया की पढ़ाई में बदलाव दिखा, तो पंचम ने इसे सिर्फ अपने घर तक सीमित नहीं रखा।
उन्होंने खुद के खर्च पर पोस्टर की फोटोकॉपी कराई और दूध बांटने के साथ-साथ गांव के अन्य बच्चों के घरों तक पहुँचे। पंचम ने न सिर्फ पालकों को इसके प्रति जागरूक किया, बल्कि बच्चों के ‘रीडिंग कॉर्नर’ (पढ़ाई के कोने) में खुद जाकर QR कोड भी चिपकाए।
छुट्टियों में शिक्षक निशांत का ‘होम वर्क’
वहीं दूसरी ओर, शिक्षक निशांत ने भी इस मुहिम को एक मिशन की तरह लिया है। गर्मी की छुट्टियों का उपयोग जहाँ लोग आराम के लिए करते हैं, वहीं निशांत गाँव-गाँव, घर-घर जाकर बच्चों को QR कोड के जरिए डिजिटल पढ़ाई के गुर सिखा रहे हैं। इस जमीनी प्रयास से बच्चों के भीतर तकनीक के जरिए सीखने का एक नया उत्साह देखने को मिल रहा है।
“गांवों में शिक्षकों और पालकों का इस तरह बच्चों की शिक्षा से सीधे जुड़ना एक क्रांतिकारी बदलाव है। जब समाज खुद जिम्मेदारी लेता है, तो परिणाम अद्भुत होते हैं।” — डाइट (DIET) कटनी प्रबंधन
जून के दूसरे सप्ताह में होगा बड़ा ट्रेनिंग प्रोग्राम
इस मुहिम की सफलता को देखते हुए डाइट (DIET) कटनी अब इसे बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। जून माह के द्वितीय सप्ताह में जिले के शत-प्रतिशत जन शिक्षकों और शिक्षकों का विशेष उन्मुखीकरण (ओरिएंटेशन प्रोग्राम) आयोजित किया जाएगा, ताकि इस तकनीक को कटनी के हर बच्चे तक सुलभ कराया जा सके।
पालकों और शिक्षकों के इस संयुक्त प्रयास से कटनी जिला शिक्षा के क्षेत्र में एक नया मॉडल बनकर उभर रहा है।