उत्तर भारत में वायु प्रदूषण का कहर: WHO की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन की चेतावनी- “22 माइक्रोग्राम PM सांस में जाना 1 सिगरेट पीने के बराबर”
नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक और एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने उत्तर भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि जहरीली हवा नवजात शिशुओं और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रही है, क्योंकि यह उनके फेफड़ों के विकास और सीखने की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर रही है।
बच्चों के फेफड़ों और दिमाग पर सीधा असर
बच्चों पर वायु प्रदूषण के गंभीर प्रभावों को रेखांकित करते हुए डॉ. स्वामीनाथन ने कहा:
अंगों के विकास में बाधा: छोटे बच्चों और शिशुओं के फेफड़े, मस्तिष्क, हृदय और रक्त वाहिकाएं (blood vessels) अभी विकसित हो रही होती हैं, जिससे वे प्रदूषित हवा के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।
1 सिगरेट के बराबर PM सांस लेना: उन्होंने बताया कि 24 घंटों के दौरान 22 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर की मात्रा में पार्टिकुलेट मैटर (PM) सांस के जरिए शरीर में जाना, 1 सिगरेट पीने के बराबर जोखिम पैदा करता है।
दिल्ली में AQI ‘खराब’ श्रेणी में, NCR में GRAP-1 लागू
गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में बनी रही। सरकारी AQI डैशबोर्ड के अनुसार सुबह एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 299 दर्ज किया गया।
प्रमुख इलाकों में AQI का स्तर: पटपड़गंज में 298, आईटीओ में 280, डिफेंस कॉलोनी में 261, आनंद विहार में 237, रोहिणी में 226 और देवली में 203 दर्ज किया गया।
GRAP का पहला चरण लागू: बिगड़ते हालात को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने पूरे दिल्ली-NCR में तत्काल प्रभाव से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण (Stage-I) को लागू कर दिया है।
यूपी में भी अलर्ट: लखनऊ में सड़कों पर पानी का छिड़काव
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी प्रदूषण का स्तर ‘खराब’ श्रेणी














