10 साल से कागजों में चल रहे श्रीराम कॉलेज की संबद्धता समाप्त; 80 MBA कॉलेजों को शपथ पत्र पर मिली सशर्त प्रवेश की मंजूरी
भोपाल: बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (BU) ने संबद्धता और प्रवेश प्रक्रिया को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा फैसला किया है। विवि प्रशासन ने करीब 10 साल से सिर्फ फाइलों और कागजों में चल रहे श्रीराम महाविद्यालय की संबद्धता को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है।
दूसरी ओर, प्रवेश प्रक्रिया में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए विश्वविद्यालय की कार्य परिषद (EC) ने करीब 80 एमबीए (MBA) कॉलेजों को केवल शपथ पत्र (Affidavit) के आधार पर काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होने की सशर्त अनुमति दे दी है। इन सभी कॉलेजों का अगले तीन महीनों के भीतर भौतिक निरीक्षण किया जाएगा।
श्रीराम महाविद्यालय का नहीं मिला अस्तित्व, सिर्फ कागजों में चल रहा था खेल
विश्वविद्यालय के सामने सबसे बड़ा और हैरान करने वाला मामला बीएड (B.Ed) कराने वाले श्रीराम महाविद्यालय का आया:
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मौके पर गायब था कॉलेज: यह कॉलेज पिछले 10 वर्षों से कागजों पर धड़ल्ले से संचालित हो रहा था। जब शिकायत मिलने के बाद विवि द्वारा गठित विशेष जांच समिति मौके पर पहुंची, तो वहां कॉलेज का कोई भवन या बुनियादी ढांचा ही नहीं मिला।
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संबद्धता खत्म: जांच रिपोर्ट में इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा होने के तुरंत बाद विश्वविद्यालय ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कॉलेज की संबद्धता (Affiliation) को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है।
85 में से केवल 22 कॉलेजों का हुआ निरीक्षण, 80 को शपथ पत्र पर राहत
एमबीए कॉलेजों की संबद्धता को लेकर भी विश्वविद्यालय की भारी लापरवाही सामने आई है:
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निरीक्षण में देरी: बीयू से संबद्ध कुल 85 एमबीए कॉलेजों में से अब तक केवल 22 का ही भौतिक निरीक्षण कराया जा सका था।
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गंभीर अनियमितताएं: इन 22 में से 3 कॉलेजों की रिपोर्ट में बेहद गंभीर कमियां और अनियमितताएं पाई गईं।
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सशर्त मंजूरी: अत्यधिक कमियों वाले करीब 5 कॉलेजों को छोड़कर, शेष 80 कॉलेजों को बिना निरीक्षण के ही केवल शपथ पत्र जमा करने के आधार पर एमबीए काउंसलिंग में शामिल होने की सशर्त मंजूरी दे दी गई है। 10 साल से कागजों में चल रहे श्रीराम कॉलेज की संबद्धता समाप्त; 80 MBA कॉलेजों को शपथ पत्र पर मिली सशर्त प्रवेश की मंजूरी
प्रभावित हुआ काउंसलिंग शेड्यूल, DTE को बदलना पड़ा टाइम-टेबल
विश्वविद्यालय द्वारा संबद्धता की जानकारी समय पर तकनीकी शिक्षा विभाग (DTE) को न भेजने का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है:
शेड्यूल में बदलाव: बीयू से संबद्ध कॉलेजों की पात्रता सूची समय पर नहीं मिलने के कारण डीटीई को पूरे मध्य प्रदेश की एमबीए काउंसलिंग और सीट आवंटन (Seat Allotment) का पूरा शेड्यूल बदलना पड़ा। अब छात्रों के भविष्य को देखते हुए विश्वविद्यालय ने शपथ पत्र के आधार पर प्रवेश शुरू कराने का रास्ता निकाला है, जबकि निरीक्षण आगामी तीन महीनों में किया जाएगा।
बीएड कॉलेजों में भी यही खेल, अब रिटायर्ड जज करेंगे 116 कॉलेजों की जांच
यह पहली बार नहीं है जब विश्वविद्यालय ने बिना निरीक्षण के शपथ पत्र पर मान्यता बांटी हो:
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इससे पहले 125 बीएड कॉलेजों को भी इसी तरह शपथ पत्र के आधार पर सशर्त अनुमति दी गई थी।
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बाद में जब इन कॉलेजों में गंभीर धांधली और अनियमितताएं सामने आईं, तो अब पूरे मामले की बारीकी से जांच कराने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश (Retired Judge) की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है, जो 116 कॉलेजों की जांच करेगी।
कुलसचिव का आधिकारिक बयान
“जांच समिति को मौके पर श्रीराम महाविद्यालय का कोई भौतिक अस्तित्व या भवन नहीं मिला। इस गंभीर फर्जीवाड़े के कारण तत्काल प्रभाव से कॉलेज की संबद्धता समाप्त कर दी गई है। एमबीए कॉलेजों को फिलहाल शपथ पत्र के आधार पर प्रवेश की अनुमति दी गई है। तीन महीने के भीतर इन सभी का निरीक्षण किया जाएगा। यदि जांच में कोई भी कमी या अनियमितता पाई गई, तो उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
– समर बहादुर सिंह, कुलसचिव, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (BU)
— विशेष शिक्षा एवं विवि ब्यूरो, विशेषांक
