बैंकिंग दिग्गजों पर टूटा बिकवाली का पहाड़: HDFC, कोटक और एक्सिस बैंक के डूबे ₹1 लाख करोड़; जानें गिरावट की 3 बड़ी वजहें
बैंकिंग दिग्गजों पर टूटा बिकवाली का पहाड़: HDFC, कोटक और एक्सिस बैंक के डूबे ₹1 लाख करोड़; जानें गिरावट की 3 बड़ी वजहें
बैंकिंग दिग्गजों पर टूटा बिकवाली का पहाड़: HDFC, कोटक और एक्सिस बैंक के डूबे ₹1 लाख करोड़; जानें गिरावट की 3 बड़ी वजहें
बिजनेस डेस्क: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार (20 जुलाई 2026) को प्राइवेट सेक्टर के दिग्गज बैंकों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई. इन्वेस्टर्स जिस क्रेडिट ग्रोथ (लोन बढ़ने) की उम्मीद कर रहे थे, वह तो आंकड़ों में दिखी, लेकिन उससे बैंकों का मुनाफा नहीं बढ़ सका. नतीजा यह हुआ कि देश के तीन बड़े निजी बैंकों—HDFC बैंक, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक—पर बिकवाली का भारी दबाव आ गया.
इन तीनों बैंकों के शेयरों में 3.50 फीसदी से लेकर 6 फीसदी से ज्यादा तक की बड़ी गिरावट देखी गई, जिससे महज कुछ ही घंटों में इनके निवेशकों के 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डूब गए (मार्केट वैल्यू कम हो गई).
किस बैंक को कितना हुआ नुकसान?
सोमवार के कारोबारी सत्र में दिग्गज बैंकों के शेयरों का हाल कुछ इस तरह रहा: बैंकिंग दिग्गजों पर टूटा बिकवाली का पहाड़: HDFC, कोटक और एक्सिस बैंक के डूबे ₹1 लाख करोड़; जानें गिरावट की 3 बड़ी वजहें
| बैंक का नाम | शेयर में गिरावट (%) | मार्केट कैप में कमी (₹) |
| एक्सिस बैंक (Axis Bank) | ~6.00% 👇 | करीब ₹25,000 करोड़ |
| HDFC बैंक (HDFC Bank) | ~5.56% 👇 | करीब ₹65,000 करोड़ |
| कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) | ~3.51% 👇 | करीब ₹14,000 करोड़ |
| कुल नुकसान | ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा |
अपवाद: जहां एक तरफ इन तीन दिग्गज बैंकों में हाहाकार मचा था, वहीं ICICI बैंक के शेयरों में लगभग 1% की बढ़त दर्ज की गई। इससे साफ है कि निवेशक बिना सोचे-समझे सभी बैंकिंग शेयर नहीं बेच रहे हैं, बल्कि उनका फैसला ग्रोथ की क्वालिटी और मुनाफे पर निर्भर है।
क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट? ये हैं 3 मुख्य कारण
बाजार जानकारों और ब्रोकरेज फर्मों के अनुसार, लोन ग्रोथ अच्छी होने के बावजूद निवेशकों के बीच इन चिंताओं के कारण बिकवाली बढ़ी:
नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर भारी दबाव
बैंकों की लोन से होने वाली कमाई और फंड जुटाने की लागत के बीच के अंतर को नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) कहते हैं। वर्तमान में कॉर्पोरेट लेंडिंग (कंपनियों को लोन देना) तेजी से बढ़ रही है, लेकिन रिटेल क्रेडिट (आम जनता का लोन) में वैसी रफ्तार नहीं है। कॉर्पोरेट लोन से बैंकों को कम रिटर्न मिलता है, जिससे मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है और ‘स्प्रेड’ कम हुआ है।
CASA डिपॉजिट में कमी और महंगी लागत
Current और Savings Account (CASA) यानी कम लागत वाले डिपॉजिट फ्रेंचाइजी कमजोर हो रहे हैं। लोग बचत खातों में कम पैसे रख रहे हैं, जिसके कारण बैंकों को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए ज्यादा ब्याज दर (उच्च लागत) वाले टर्म डिपॉजिट (FD) और उधारी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे बैंकों के फंड की लागत बढ़ गई है।
लीडरशिप को लेकर अनिश्चितता
क्रेडिट विस्तार के साथ-साथ कुछ बड़े निजी बैंकों में लीडरशिप (शीर्ष प्रबंधन) को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी निवेशकों के भरोसे को डगमगाया है।
ब्रोकरेज फर्म्स (Equirus Securities) का क्या है कहना?
इक्विरस सिक्योरिटीज (Equirus Securities) की एक समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, ICICI बैंक को छोड़कर लगभग सभी बड़े प्राइवेट बैंकों के मार्जिन में ‘मिड-टीन’ बेसिस-पॉइंट की क्रमिक गिरावट देखी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कॉर्पोरेट क्रेडिट में यह तेजी वर्किंग कैपिटल की बढ़ती मांग और बॉन्ड मार्केट से हटकर बैंकों से उधार लेने की प्रवृत्ति के कारण है। लेकिन अब निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि रिटेल ग्रोथ कब तक टिकेगी और बैंकों के मार्जिन में सुधार कब से शुरू होगा।
— सौरभ शर्मा, स्टॉक मार्केट डेस्क








