मध्यप्रदेश के स्कूलों से 8.66 लाख छात्र गायब: शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नामांकन में भारी गिरावट, 12 से ज्यादा DPC को नोटिस
विशेष संवाददाता भोपाल: मध्यप्रदेश के स्कूली शिक्षा तंत्र से एक चौंकाने वाली और चिंताजनक खबर सामने आई है। प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में दर्ज विद्यार्थियों की संख्या में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई है। चालू शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान पहली से बारहवीं कक्षा तक करीब 8.66 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ दी है या उनका नामांकन पोर्टल पर दर्ज नहीं हुआ है।
पिछले शैक्षणिक सत्र की तुलना में इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की कमी ने स्कूल शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के कान खड़े कर दिए हैं।
क्या बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं या सिर्फ पोर्टल की लापरवाही?
नामांकन में दर्ज इस बड़ी गिरावट के सटीक और वास्तविक कारणों पर फिलहाल असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विभाग दो मुख्य संभावनाओं पर विचार कर रहा है:
ड्रॉपआउट (Dropouts): आशंका जताई जा रही है कि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने आर्थिक, सामाजिक या पलायन के कारणों से पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी है।
पोर्टल और प्रोफाइल अपडेट में लापरवाही: कई स्कूलों द्वारा विद्यार्थियों की प्रोफाइल और एनरोलमेंट डेटा को एजुकेशन पोर्टल पर समय पर अपडेट नहीं किया गया है, जिसके कारण डिजिटल रिकॉर्ड में यह गिरावट नजर आ रही है।
राज्य शिक्षा केंद्र की सख्त कार्रवाई: 12 से अधिक जिलों के DPC को थमाया नोटिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने डेटा एंट्री में घोर लापरवाही और नामांकन की सही स्थिति स्पष्ट न कर पाने पर 12 से अधिक जिलों के जिला परियोजना समन्वयकों (DPC) को ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी कर जवाब तलब किया है। मध्यप्रदेश के स्कूलों से 8.66 लाख छात्र गायब: शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नामांकन में भारी गिरावट, 12 से ज्यादा DPC को नोटिस
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यदि जिला स्तर पर अधिकारियों की लापरवाही पाई जाती है तो उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, मैदानी अमले को घर-घर जाकर यह सत्यापित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं कि क्या छात्र वास्तव में स्कूल छोड़ चुके हैं या केवल तकनीकी खामी के कारण रिकॉर्ड से बाहर हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
योजनाओं पर असर: सर्व शिक्षा अभियान और मुफ्त यूनिफॉर्म/साइकिल जैसी सरकारी योजनाओं के दावों के बीच 8.66 लाख बच्चों का रिकॉर्ड से बाहर होना शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
मैदानी वेरिफिकेशन की जरूरत: शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आंकड़ा सच में पढ़ाई छोड़ने (Dropouts) का है, तो यह प्रदेश के भविष्य के लिए एक गंभीर संकट है, जिस पर तुरंत विशेष नामांकन अभियान चलाने की जरूरत है।











