60 सीटों पर 27 फरवरी को होंगे चुनाव, जानिए मेघालय की राजनीति के बारे में सबकुछ
नई दिल्ली । मेघालय विधानसभा चुनाव में अबकुछ ही दिन बचे हैं. चुनावी ‘दंगल’ के नजदीक आते देख तमाम दलों ने कमर कस ली है. सत्तासीन कांग्रेस अपनी कुर्सी बचाने में लगी है, तो वहीं वहीं उसके विरोधी उसे मात देने की कोशिश में हैं. यहां 60 विधानसभा सीटों के लिए 27 फरवरी को वोटिंग और मतगणना 3 मार्च को होगी। बता दें कि मेघालय में 55 सीटें अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं. विधानसभा का कार्यकाल 6 मार्च को खत्म हो रहा । आइए जानते हैं मेघालय की राजनीति के बारे में

मेघालय में कांग्रेस, यूडीपी, एचएसपीडीपी, बीजेपी, एनसीपी, एनपीपी और एनईएसडीपी सरीके दल ‘अखाड़े’ में हैं. इनके अलावा कुछ निर्दलीय भी किस्मत आजमा रहे हैं. कांग्रेस ने 60 सीटों में से 57 पर कैंडिडेट उतारे हैं, जिसमें सीएम मुकुल संगमा 2 सीटों से चुनाव लड़ेंगे. संगमा को सोंगसाक और आमपथी विधानसभा सीटों से मैदान में उतारा है. बता दें कि वर्तमान में यहां पिछले 2 टर्म से कांग्रेस की सरकार है।

दूसरी ओर बीजेपी ने अभी 45 कैंडिडेट का ही ऐलान किया है हालांकि, पार्टी ने राज्य में विधानसभा की सभी 60 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है. एक के बाद कई राज्यों को अपनी रणनीति से जीतने वाले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह इस बार नॉर्थ ईस्ट में पार्टी की पकड़ को मजबूत करने की फिराक में हैं. इसी उद्देश्य की पूर्ति दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह प्रदेश में रैलियां कर चुके है।

बीते समय में पीएम मोदी ने मेघालयवासियों को ‘शिलांग-नोंगस्टोइन-रोंगजेंग-तुरा रोड’ का तोहफा दिया. एक जनसभा संबोधन में उन्होंने लोगों से प्रदेश के विकास का वादा भी किया. चुनाव को देखते हुए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी प्रदेश का दौरा कर चुके हैं. शाह ने प्रदेश में विकास न होने के पीछे वर्तमान सांगमा सरकार को जिम्मेदार ठहराया. बता दें कि 2013 के चुनावों में यहां बीजेपी का खाता भी नहीं खुला था. उस चुनाव में 13 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी।

वैसे वर्तमान में, मेघालय में कांग्रेस का पलड़ा भारी दिख रहा है. और बीजेपी की राह उतनी आसान नहीं दिखाई दे रही. इसकी मुख्य वजह ‘मुकुल सांगमा’ हैं, जो प्रदेश में कांग्रेस के बड़े नेता हैं. वो प्रदेश के सियासी समीकरणों पर मजबूत पकड़ रखते हैं, जिनके बलबूत संगमा ने बीते समय में कांग्रेस को यहां विकट परिस्थितियों से निकाला. मेघालय के मुख्यमंत्री मुकुल संगमा लगातार 4 बार से विधायक हैं. राज्य में पार्टी की जीत का श्रेय संगमा को दिया जा रहा है. हालांकि, वो इस बार 2 सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं।

दूसरी ओर मेघालय में सियासी जमीन तलाशने में जुटी बीजेपी भी खुद को कमतर आंकने की कोशिश में नहीं है. उसने प्रदेश के लिए अपने विजन डॉक्यूमेंट में बीपीएल परिवारों की महिलाओं के लिए मुफ्त सैनिटरी नैपकिन, दिहाड़ी मजदूरों को पेंशन देने और राज्य सरकार के कर्मचारियों से सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने का भी वादा किया. ‘डेवलमेंट’ को बीजेपी ने एक बार फिर चुनावी एजेंडा बनाया है।

मेघालय की मौजूदा मुकुल संगमा नीत कांग्रेस सरकार में स्वतंत्र विधायकों की खूब चलती है. पार्टी अंदरुनी कलह की शिकार है सो उनके दांव-पेंच से अक्सर आशंका खड़ी होती है कि सरकार कहीं पटरी से ना उतर जाए. और यही बात बीजेपी को प्रदेश में एडवांटेज दे सकती है. हालांकि यूडीपी, एचएसपीडीपी, एनसीपी, एनपीपी और एनईएसडीपी की मौजदूगी ने चुनाव को रोमांचक बना दिया है. ये तो वक्त ही बताएगा की ‘प्रदेश का ताज’ किसके सिरमौर होगा।

