इन 45 बड़े रेलवे ब्रिज 55 साल से ज्यादा पुराने, मेंटेनेंस के लिए ब्रिज विभाग के पास अमला नहीं

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रतलाम। रतलाम-मुंबई रेलमार्ग पर झाबुआ जिले के बजरंगगढ़-थांदला रोड सेक्शन के बीच रविवार शाम ब्रिज क्रमांक 178 की दीवार ढहने के बाद रेलवे ने सोमवार दोपहर 3.30 बजे मरम्मत का काम पूरा कर लिया।

इसके बाद 10 किमी प्रतिघंटा की गति निर्धारित कर दोपहर 3.50 बजे पहली मालगाड़ी वहां से निकाली।ट्रैकमैन बलवंत परमार की सजगता से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस घटना ने रेलवे के जर्जर ब्रिजों की मरम्मत के दावों की पोल खोल दी है। रेलवे के अनुसार ही 19 ब्रिज की वैधता (उपयोग समय अवधि) समाप्त हो चुकी है।

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रतलाम रेल मंडल में मुंबई-दिल्ली रेलमार्ग पर ही 45 ब्रिज ऐसे हैं, जिनकी उम्र 55 साल से अधिक है। बूढ़े हो चूके इन ब्रिजों से प्रतिदिन अप व डाउन ट्रैक पर 70 मालगाड़ी व 60 यात्री ट्रेनेें गुजरती हैं। मंडल में छोटे बड़े ब्रिजों की संख्या 544 है। रेलवे के अनुसार ही 19 ब्रिज की वैधता (उपयोग समय अवधि) समाप्त हो चुकी है। इनके नवीनीकरण को लेकर प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। इसके बावजूद रेलवे इन ब्रिजों पर ट्रेनों का परिचालन नहीं रोका।

अमले की कमी

पर्याप्त मेंटेनेंस के लिए ब्रिज विभाग के पास अमला नहीं है। 45 बड़े ब्रिजों में से अधिकांश का निर्माण वर्ष 1958-60 के दौरान हुआ। इनका उपयुक्त मेंटेनेंस नहीं हो सका है। यही वजह रही कि ब्रिज की दीवार ढहने की स्थित बनी। हालांकि रेलवे की नजर में पुल अभी भी उपयोग लायक हैं। नवंबर 2017 में मंडल स्तर पर ब्रिज के मेंटेनेंस के लिए टेंडर जारी किए गए, लेकिन इस घटना ने मेंटेेनेंस की पोल खोल दी है।

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समय पर मेंटेनेंस होता है

महाप्रबंधक की मौजूदगी में सामूहिक प्रयास से मरम्मत का काम पूरा किया गया। सुधार के बाद दोपहर में ट्रैक चालू कर दिया गया है। 19 ब्रिज के नवीनीकरण की प्रक्रिया चल रही है। ब्रिजों को समय पर मेंटेनेंस किया जाता है।

-आरएन सुनकर, डीआरएम रेल मंडल रतलाम