भाई दूज की यह है पौराणिक कथा, जानिए आज शुभ मुहूर्त

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धर्म डेस्क। दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव का आखिरी दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि को भाई दूज के रूप में मनाया जाता है। भाई-बहन के स्नेह और प्रेम का प्रतीक भाई दूज का पर्व इस वर्ष 21 अक्टूबर शनिवार को है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यम द्वितीया एवं भाई दूज कहा जाता है।

शुभ मुहूर्त

यह पर्व मनाने का शुभ मुहूर्त सुबह 7.50 बजे से 9.15 बजे तक है। इसके बाद दूसरा मुहूर्त सुबह 10.38 बजे से 1.26 बजे तक भी तिलक कर सकते हैं। प्रात: 9.15 बजे से 10.38 बजे तक राहुकाल रहेगा।

शुभप्रद है योग

इस बार भाई दूज पर शुभ योग बन रहा है। इस दिन द्वितीया तिथि, स्वाति नक्षत्र, प्रीति योग, बालव करण, शनिवार होने के साथ ही तुला राशि पर सूर्य, चंद्रमा, बुध, बृहस्पति का मिलन (चतुर्ग्रही योग) शुभप्रद रहेगा। इस योग की वजह से भाई-दूज पर पूजन आदि का विशेष महत्व रहेगा।

यह है कथा

मान्यता है कि भाई-दूज के दिन सूर्य पुत्र यम ने अपनी बहन यमुना घर जाकर भोजन कर उपहार भेंट किया था। तभी से यह त्योहार यम द्वितीया एवं भाई दूज के रूप में मनाया जाता है। इस दिन यम की पूजा के पश्चात यमुना जी की पूजा-अर्चना की जाती है।

इसके साथ ही इस पर्व पर यमुना में स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन जो भाई अपनी बहन का आतिथ्य स्वीकार करते हैं उन्हें यमराज का भय नहीं रहता। यमराज अपनी बहन यमुना से बहुत प्यार करते थे, लेकिन ज्यादा काम होने के कारण अपनी बहन से मिलने नहीं जा पाते थे। एक बार यमराज के पास उनकी बहन यमुना का संदेश आया तो यमराज सब कुछ छोड़कर उनसे मिलने पहुंच गए थे।

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यम ने दिया था यह वर

यमुना अपने भाई को देख खुश हो गईं और यम के लिए खाना बनाया व आदर सत्कार किया। बहन का प्यार देखकर यमराज इतने खुश हुए और विदा लेने के दौरान वर मांगने को कहा। यमुना ने उनके इस आग्रह को सुन कहा कि अगर आप मुझे वर देना ही चाहते हैं तो यही वर दीजिए कि जो भी मेरे जल में स्नान करे और मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करे, वह यमपुरी नहीं जाए।

इसी तरह से यम द्वितीया का त्योहार शुरू हुआ। तभी से यह मान्यता चली आ रही है कि कार्तिक शुक्ल द्वितीय को जो भाई अपनी बहन का आतिथ्य स्वीकार करते हैं उन्हें यमराज का भय नहीं रहता। इसीलिए तभी से भाई-बहन के प्यार और स्नेह का त्योहार मनाया जा रहा है।

लंबी होती है आयु

भविष्योत्तर पुराण में यम द्वितीया यानी भैया दूज मनाने का यही कारण बताया गया है। पुराण के अनुसार यमराज ने यमुना को वरदान दिया है कि जो भी व्यक्ति यमद्वितीया के दिन यमुना के जल में स्नान करके बहन के घर जाकर उनके हाथों से बना भोजन करेगा उसकी आयु लंबी होगी।

यमद्वितीया के दिन अगर यमुना में स्नान नहीं पाते तो बहन के घर जाकर उसके हाथों से यमुना जल का टीका लगवाएं और उनके हाथों से बना भोजन करें तो इससे भी अकाल मृत्यु से रक्षा होती है। भाई दूज का रात को यमराज के नाम का चौमुखा दीपक जला कर मुख्य दरवाजे पर रखें. ऐसा करने भाई पर किसी प्रकार का विघ्न या बाधा नहीं आती है और उसका जीवन सुखमय रहता है।

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ऐसे करें पूजा

सबसे पहले बहनें चावल के आटे से चौक बनाएं।

इस चौक पर भाई को बिठाकर भाई की हथेली पर चावल का घोल लगाएं।

इसके बाद इसमें सिंदूर, पान, सुपारी, मुद्रा आदि हाथों पर रख कर धीरे-धीरे भाई की लंबी आयु और खुशहाली की कामना करें।

इसके बाद भाई की आरती उतारें और कलावा बांधकर मुंह मीठा कराएं।

शाम के समय बहनें यमराज के नाम से चौमुख दीपक जलाकर घर के बाहर दीये का मुख दक्षिण दिशा में करते हुए उसे रखें।