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९ जून अंतिम तारीख और अभी 50% से अधिक अनाज की तुलाई बाकी

gehu ki bori

कटंगी।मध्यप्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित चना मसूर की तुलाई के लिए भावान्तर योजना में जहां सरकार किसानों की सुविधाओं के लिए अनेक बातें कर रही है तो वही दूसरी ओर मंडियों में कर्मचारियों और प्रबन्धन की लापरवाही से किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मामला है कटंगी उपमंडी का जहां चना और मसूर की तुलाई चल रही है।कटंगी मंडी में किसान अपना अनाज लेकर तुलाई कराने आ तो अपने समय से जाता है लेकिन अनाज बेचकर कब लौटेगा या फिर कितने दिन और कितनी रात उसको उसी अनाज के ढेर पर सोना पड़ेगा इस बात की कोई गारंटी नही है।

सबसे बड़ी मुसीबत इस समय गरीब और छोटे किसानों की बनी हुई है जो सुबह से अपना अनाज लेकर मंडी तो आ जाते हैं लेकिन अपने अनाज की तुलाई की बारी का इंतजार करते करते सुबह से शाम और दूसरा दिन हो जाता है क्योंकि मंडी प्रबन्धन, अनाज सर्वेयर और कर्मचारी मुह देख देखकर अनाज की तुलाई करवा रहे है।बड़े और रसूखदार किसानों का अनाज कुछ मिनटों में तुल जाता है

और उसको उसकी रसीद भी तत्काल मिल जाती है जबकि गरीब किसान अपनी बारी का इंतजार ही करता रह जाता है।इतनी भीषण गर्मी में अपना अनाज आसमान के नीचे डालकर जहाँ किसान परेशान हो रहा तो वहीं मानसून का कोई भरोसा नही की कब आ जाये और किसान की सारी मेहनत पानी मे चली जाए।सूत्रों की माने तो मंडी कर्मचारियों की सांठ गांठ और मिलीभगत से बड़े बड़े और रसूखदार किसानों के अनाज की तुलाई उनके घर पर ही हो जाती है और उनको वही रसीद भी प्राप्त हो जाती है।

एक ओर जहां मंडी में अनाज तुलाई का वारदाना कम पड़ रहा है तो दूसरी ओर बड़े बड़े किसानों के घर पर ही तुलाई का वारदाना पहुंच जाता है और उनके घर में ही तुलाई हो जाती है।अभी कुछ दिन पूर्व ही एक रसूखदार किसान का करीब २०० बोरी वारदाना से भरा हुआ ट्रैक्टर किसानो ने मंडी परिसर में ही पकड़ लिया था और जब आक्रोशित किसानों ने उस ट्रैक्टर को पुलिस के हवाले करना चाहा तो मंडी के कर्मचारियों ने बात को टाल मटोल करते हुए मामले को रफा दफा कर दिया।

इन सब बातों से ये स्पष्ट हो जाता है कि बड़े रसूखदार किसानों और कर्मचारियों की सांठ गांठ बहुत जोरों पर चल रही है और कमीशन का खेल बहुत तेज गति से चल रहा है।छोटे छोटे और गरीब किसानों के अनाज से मंडी कर्मचारियों को कोई मतलब नही है उनको सिर्फ अपनी जेब भरने की पड़ी है।जिन किसानों का अनाज जैसे तैसे तुल गया है तो उनके खाते में पैसे नही पहुँच पा रहे हैं।इन सभी मामलों में जब कटंगी मंडी प्रबन्धक से जानकारी ली गई तो उन्होंने अपने आप को अस्वस्थ्य बताते हुए किसी भी सवाल का जवाब नही दिया।

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