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सपा में शिवपाल ने बनाया तीसरा मोर्चा, बिगड़ सकता है अखिलेश का प्लान

यूपी डेस्कः देश की राजनीति में उतार-चढ़ाव लगे रहते हैं। यहां कब क्या हो जाए कुछ नहीं कहा जा सकता। राजनीतिक पार्टियों में रार आना तो आम बात है, लेकिन राजनीतिक परिवार में मतभेद पैदा हो जाएं तो यह विपक्ष के लिए सुनहरा मौका जरूर साबित हो जाता है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार समाजवादी पार्टी में कलह मची हई है। यह घमासान यूपी विधानसभा चुनाव के पहले से ही चला आ रहा है, लेकिन बुधवार को शिवपाल यादव के नए मोर्चे के गठन के एेलान ने एक बार फिर आग में घी डालने का काम किया है।

15 28 3136650705 llहोली के मौके पर दोनों को एक साथ त्योहार मनाते देख अनुमान लगाए जा रहे थे कि चाचा-भतीजे के मतभेद खत्म हो गए हैं, लेकिन कहते हैं कि रिश्तों का धागा अगर टूट कर जुड़ भी जाए तो गांठ रह ही जाती है। चाचा-भतीजे में मतभेद इतना बढ़ा कि दोनों मिलकर भी कभी ना मिल पाए। अब लोकसभा चुनाव से पहले परिवार में कलह खुलकर सामने आने से सपा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। एेसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि इनकी फूट का फायदा विपक्ष को पहुंच सकता है।

15 35 160149070untitled ll2016 में खुलकर सामने आए चाचा-भतीजे के मतभेद 
बता दें कि, 2016 में दोनों चाचा-भतीजे के मतभेद खुलकर सामने आए थे। एक-दूसरे को पार्टी में औकात याद दिलाने और खुद को साबित करने के लिए दोनों सियासी अटकलों को बढ़ावा देते रहें। सपा की इस रार में अखिलेश यादव से प्रदेश अध्यक्ष पद छीन लिया गया था। जिसके जवाब में अपनी पावर का इस्तेमाल करके अखिलेश ने भी शिवपाल से अहम मंत्रालय छीन लिए थे।

15 27 3445770704 llघमासान से हिली पार्टी की नींव
यूपी विधानसभा चुनाव से पहले दोनों नेताआें में बढ़ते विवाद के चलते पार्टी की नींव हिला दी। पार्टी में बढ़ते खतरे को देखकर मुलायम सिंह यादव ने दोनों का मिलाप भी करवाया, लेकिन बात नहीं बनी। शिवपाल को मात देने के लिए अखिलेश ने खुद को सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित करवा दिया। अध्यक्ष बनने के बाद अखिलेश ने एक के बाद एक दांव चला। उन्होंने मुलायम सिंह यादव को पार्टी का संरक्षक बना दिया।

15 28 0464370703 llकई बार की दूसरे दल में शामिल होने की कोशिश 
मुलायम के संरक्षक बनने से शिवपाल पार्टी में खुद को असहज महसूस करने लगे। पार्टी में उन्हें कोई उच्च पद नहीं मिला, जिससे वह रूखे-रूखे से रहने लगे। इस दौरान शिवपाल ने कई बार दूसरी पार्टी लॉन्च करने या किसी और दल में शामिल होने की कोशिश भी की, लेकिन बड़े भाई मुलायम सिंह के प्यार के चलते वो कोई फैसला नहीं ले पाए। डेढ़ साल से अधिक इंतजार करने के बाद भी जब बात नहीं बनी तो शिवपाल का धैर्य जवाब दे गया आैर अंततः उन्होंने नए मोर्चे का एेलान कर दिया। उनके इस कदम से समाजवादी पार्टी समेत यूपी की राजनीति में हलचल मच गई।

15 31 0090810708 llसाइकिल आगे बढ़ती जाएगी: अखिलेश 
शिवपाल के इस फैसले के फौरन बाद अखिलेश यादव ने प्रेस कांफ्रेंस कर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। अखिलेश यादव ने अप्रत्यक्ष रूप से इसके लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे लोकसभा का चुनाव नजदीक आएगा इस तरह की चीजें देखने को मिलेंगी। हमें इस पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देना है। हमारा लक्ष्य आगामी लोकसभा चुनाव है, जिसके लिए हम लगातार मेहनत कर रहे हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि इन सब गतिविधियों के बावजूद साइकिल आगे बढ़ती जाएगी।

15 27 0823410706 llबिगड़ सकता है अखिलेश का प्लान
विधानसभा चुनाव के दौरान चाचा-भतीजे के राजनीतिक विवाद ने समाजवादी पार्टी को काफी नुकसान पहुंचाया था। नतीजा ये रहा कि पार्टी यूपी की सत्ता से बाहर हो गई। यूपी में फिर से अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अखिलेश ने प्रदेश के बसपा, कांग्रेस और रालोद जैसे दलों से गठबंधन कर लिया आैर उपचुनाव में बीजेपी को करारी मात दी। अखिलेश के इस फैसले ने बीजेपी को फिर से बैकफुट पर ढकेल दिया। अब जब अखिलेश मुस्तैदी के साथ बीजेपी को हराने के लिए अागे बढ़ रहे हैं तो शिवपाल यादव फिर से उनके आगे रोड़ा बनकर खड़े हो गए हैं। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि अखिलेश, चाचा शिवपाल के इस मोर्चे का कैसे मुकाबला करते हैं।

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