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चमत्कार या लापरवाही? परिजन जिसे मृत समझकर ले गए थे पोस्टमार्टम कराने, अस्पताल पहुँचते ही लौट आईं उसकी सांसें

चमत्कार या लापरवाही? परिजन जिसे मृत समझकर ले गए थे पोस्टमार्टम कराने, अस्पताल पहुँचते ही लौट आईं उसकी सांसें

चमत्कार या लापरवाही? परिजन जिसे मृत समझकर ले गए थे पोस्टमार्टम कराने, अस्पताल पहुँचते ही लौट आईं उसकी सांसें

धार/बदनावर: मध्य प्रदेश के बदनावर से एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई दंग है। एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल युवक को उसके परिजन मृत समझकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल ले आए थे। लेकिन जैसे ही डॉक्टरों ने शव का परीक्षण शुरू किया, युवक की धड़कनें और सांसें चलती हुई पाई गईं। यह देखते ही अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया और परिजनों की आंखें फटी की फटी रह गईं।

 आर्थिक तंगी के कारण बीच में छोड़ना पड़ा था इलाज

जानकारी के अनुसार, बटवाड़िया कलां का रहने वाला प्रकाश (पिता मोहन) शनिवार रात बखतगढ़ के समीप लाल घाटी क्षेत्र में एक भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गया था। गंभीर हालत में उसे पहले बदनावर सिविल अस्पताल और फिर रतलाम रेफर किया गया। स्थिति में सुधार न होने पर उसे इंदौर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

परिजनों ने बताया कि बेहद खराब आर्थिक स्थिति और इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ होने के कारण, वे भारी मन से प्रकाश को इंदौर से वापस घर ला रहे थे। इसी दौरान रास्ते में प्रकाश के शरीर में कोई हलचल नहीं हुई और परिजनों को लगा कि उसने दम तोड़ दिया है।

 पोस्टमार्टम टेबल पर चला ‘जिंदगी’ का पता

युवक को मृत मानकर परिजन सीधे सिविल अस्पताल के शवगृह (Post-Mortem Room) पहुँचे। लेकिन जब ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने नियमानुसार पोस्टमार्टम से पहले युवक की नब्ज और दिल की धड़कन जांची, तो वे चौंक गए। युवक की सांसें चल रही थीं।

अस्पताल प्रशासन का बयान: > “युवक की धड़कनें सक्रिय थीं। स्थिति को देखते हुए बिना समय गंवाए उसे तत्काल प्राथमिक उपचार दिया गया और प्राथमिक औपचारिकताएं पूरी कर तुरंत उच्च उपचार के लिए रेफर किया गया।”

 फिलहाल निजी अस्पताल में इलाज जारी

मौत के मुंह से खींचकर वापस लाए गए प्रकाश को फिलहाल एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टर्स की एक टीम उसकी निगरानी कर रही है और उसका उपचार जारी है। इलाके में यह घटना इस समय कौतूहल और चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इसे भगवान का चमत्कार मान रहे हैं, तो वहीं यह घटना बिना डॉक्टरी पुष्टि के किसी को मृत मान लेने की जल्दबाजी पर भी एक बड़ा सबक देती है।

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