विदेश से एमबीबीएस के लिए भी ‘नीट’ जरूरी

भोपाल । विदेश में मेडिकल पढ़ाई के लिए भी स्टूडेंट्स को नेशनल एलिजिबिलिटी कम इंट्रेंस टेस्ट (नीट) पास करना होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अगले साल से इसे अनिवार्य करने का फैसला किया है। नीट को लेकर जारी होने वाली अधिसूचना में यह प्रावधान जुड़कर आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने एमबीबीएस में एडमिशन के लिए चिकित्सा शिक्षा नियमन कानून में संशोधन किया था।

इसके बाद भारत में डॉक्टर बनने के लिए नीट अनिवार्य हो गया है। इसी कानून के दायरे में यह भी शामिल है कि कोई भी भारतीय डॉक्टरी की डिग्री कहीं से भी लेता है तो पहले उसे नीट पास करना होगा। यदि कोई विदेशी नागरिक भारत में मेडिकल की पढ़ाई करना चाहता है तो भी उसे नीट पास करना होगा।

नीट पास किए बिना मान्य नहीं होगी डिग्री

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 2018-19 के सत्र से जो भी छात्र विदेशों में मेडिकल पढ़ाई करना चाहते हैं, उनके लिए नीट पास करना जरूरी है। विदेश जाने के लिए एमसीआई से अहर्ता प्रमाण पत्र लेना होता है। यह प्रमाण पत्र उन्हीं को मिलेगा, जो नीट पास करंेगे। यदि कोई बिना नीट पास किए विदेशों से मेडिकल की डिग्री लेते हैं तो वह देश में मान्य नहीं होगी। विदेशों से मेडिकल की डिग्री लेने के बाद स्क्रीनिंग टेस्ट भी देना होता है।

वह व्यवस्था जारी रहेगी। इससे विदेशों से डॉक्टरी पढ़कर आने वाले छात्रों की गुणवत्ता सुधरेगी। विदेशों से डॉक्टरी की डिग्री लेकर आने वाले 80 फीसदी नौजवान स्क्रीनिंग टेस्ट के पहले प्रयास में फेल हो जाते हैं। दूसरी तरफ नीट में करीब 12 लाख छात्र हर साल बैठते हैं। जिनमें से छह लाख इसे पास कर लेते हैं, लेकिन देश में सीटें सिर्फ 65 हजार के लिए है।

नीट में हुए ये बदलाव

अगले साल से नीट में सामान्य वर्ग के 25 साल तक और आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार 30 साल तक बैठ सकते हैं। तीन प्रयासों का प्रावधान खत्म करने के साथ नीट की परीक्षा साल में दो बार होगी और छात्रों के बेस्ट स्कोर को शामिल किया जाएगा।

करीब 10 मेडिकल स्टूडेंट जाते हैं विदेश

– भारत से हर साल करीब 10 हजार छात्र मेडिकल की डिग्री लेने के लिए विदेश जाते हैं। चीन में 15 हजार, रूस में सात हजार तथा अन्य देशों में करीब छह हजार छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं।

– सरलता से एडमिशन मिलने के कारण भारतीय स्टूडेंट्स विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने ज्यादा जाते हैं। भारत में निजी कॉलेजों की तुलना में विदेश में पढ़ाई सस्ती है।

– रूस, चीन समेत कई देशों में मेडिकल की सीटें बहुत हैं, वहां आसानी से छात्रों को बिना किसी टेस्ट के एडमिशन मिल जाता है। जबकि भारत में एडमिशन बेहद कठिन है।

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