विजयराघवगढ़ महोत्सव में सुंदर रामलीला प्रसंग: श्रीराम ने किया वन प्रस्थान, दशरथ ने त्यागे प्राण

कटनी । विजयराघवगढ़ महोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों मेले ठेले की रौनक के साथ ही धर्मप्रेमी जनता के लिए मेला ग्राउंड में वृंदावन की प्रसिद्ध रामलीला मंडली के द्वारा मंचन महाकौशल, बुंदेलखंड एरिया में पहली बार हो रहा है वृंदावन की श्री कृष्ण लीला संस्थान मंडली द्वारा जारी रामलीला मंचन में कलाकारों ने विविध लीलाओं का उत्कृष्ट मंचन किया जा रहा है।

कल रात हुए राम लीला मंचन में प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण व सीता सहित वन को प्रस्थान कर देते हैं। मंत्री सुमंत बहुत समझाते हैं लेकिन वह वापस नहीं लौटते। वैसे ही राजा दशरथ फूट-फूट कर रोने लगे और पूरी अयोध्या नगरी में शोक छा गया।

भगवान राम के साथ अयोध्या के हजारों नर, नारी भी वन गमन करने को तैयार हो गए। यह मंचन देख उपस्थित दर्शकों की भी आँखें नाम हो गयीं। अपने पुत्र राम के वापस न लौटने की खबर पर राजा दशरथ विलाप करते-करते रानी कौशल्या को कुमार श्रवण की कहानी बताते हैं कि जब मैं राजकुमार था तो शब्दभेदी बाण से श्रवण कुमार को मृग समझ कर मार दिया था।

तब उनके माता-पिता ने मुझे श्राप दिया कि जिस पुत्र वियोग में हम मर रहे हैं। एक दिन तुम भी मरोगे। इसके बाद वह प्राण त्याग देते हैं। श्रावण कुमार द्वारा अपने माता-पिता को तीरथ के लिये ले जाना और उस दौरान राजा दशरथ के तीर से घायल श्रवण कुमार के मौत और फिर उनके माता-पिता के विलाप के मंचन को देख दर्शक हुए भाव विभोर हो गए।

रामलीला मंचन के दौरान विधायक संजय पाठक, उदयराज सिंह,मनीष देव मिश्रा,रंगलाल पटेल,गुड्डा सोनी,रमाकांत तिवारी सहित हजारों की संख्या नागरिक के लीला को देखा।








