रेल सुरक्षा : खतरे की जानकारी देकर पहचान गुप्त रख सकेंगे कर्मचारी
ग्वालियर। रेल दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए रेलवे अब संरक्षा सूचना प्रबंधन प्रणाली को विकसित करने का प्रयास कर रहा है। जिसके तहत रेल कर्मचारी निर्धारित फार्मेट में जानकारी देकर खतरे को लेकर आगाह कर सकते हैं। इसमें सूचना देने वाले की पहचान बिना मर्जी के ओपन नहीं की जाएगी, साथ ही किसी प्रकार की कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई भी नहीं होगी। इस संबंध में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने सभी महाप्रबंधकों को पत्र जारी किया है।
इसका उद्देश्य कोई आपदा घटित होने या उसके बेकाबू होने से पहले सुधारात्मक कार्रवाई करना है। रेल कर्मचारियों द्वारा उनके कार्य करने के दौरान नोट की जाने वाली असुरक्षित कार्यपद्धतियों, संरक्षा खतरों, संरक्षा जोखिमो, असावधानीवश होने वाली गलतियों और खतरनाक परिस्थितियों को स्वेच्छा से खुलासा करने प्रोत्साहित करने के लिए इस प्रणाली को प्लेटफार्म के रूप में विकसित किया गया है।
इस प्रणाली के तहत यदि कोई कर्मचारी जानकारी या सूचना देता है तो रिपोर्ट करने वाले खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, जब तक की ऐसा जोखिम गैर कानूनी गतिविधियों या दुराग्रह से प्रभावित न हो। साथ ही रिपोर्ट करने वाले कर्मचारी की पहचान भी उसकी सहमति के बिना जाहिर नहीं की जाएगी।
ऐसे होगी रिपोर्टिंग
कर्मचारी को इसके लिए डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू सेफ्टी.इंडियनरेल.जीओवी.इन में लॉग इन करना होगा। इसके बाद वालेन्ट्री सेफ्टी रिपोर्टिंग को चुनना है, फिर रिपोर्टिंग सेफ्टी हेजर्ड को चुनकर खतरे के बारे में जानकारी देना है। यदि रिपोर्ट करने वाला व्यक्ति इसे गुप्त रखना चाहता है तो उसे कांन्फीडेन्शियल रिपोर्ट पर क्लिक करना होगा। ऐसा करने पर खतरे के संबंध में एक यूनीक आईडी और फीडबैक प्राप्त होगा। जोखिम का विवरण सब्मीट होने के बाद सिस्टम एक यूनिक 13 डिजिट की आईडी जनरेट करेगा, जिसे कर्मचारी नोट कर सकता है। जिससे उसे आगे वास्तुस्थिति जानने में मदद मिलेगी।

