Jabalpur : रेड जोन में ई पास सिर्फ फॉर्मेलिटी के लिए: नही हो रही कोई चेकिंग, संस्कारधानी ग्राउंड रिपोर्ट
ई पास तो सिर्फ नाम के लिए था, ना कहीं कोई चेकिंग ना कोई हुआ क्वॉरेंटाइन,न ही लिए किसी के सेंपल।
हजारों की संख्या में लोग मुंबई अहमदाबाद से शहर आए
जबलपुर। शहर में लगातार को रोना का संकट छाया हुआ है शहर की जो लोग महाराष्ट्र गुजरात एवं दिल्ली में फंसे हुए थे जब ई पास जारी हुए तो फटाफट वे अपने शहर की ओर पहुंच गए परंतु विडंबना यह है कि शहर आने के बाद इनका ना तो कोई सैंपल लिया गया है और ना इनसे कोई प्रशासनिक अमला मिलने गया है कहने का तात्पर्य यह है कि पूरा शहर इस रिस्क में चल रहा है कि अगर कहीं से निकल आया तो देखेंगे वरना कहां तक लोगों की जांच करें।
मुंबई पुणे अहमदाबाद से आने वालों की संख्या ज्यादा
अगर हम ईपास की वेबसाइट पर नजर डालते हैं तो हम देखते हैं कि कई हजारों की संख्या में लोगों ने ईपास के लिए एप्लीकेशन दीजिए और सभी जब ईपास जारी हो गए तो शहर की ओर आ गए इनमें से कुछ लोगों का कहना था की चेकिंग प्वाइंट पर उनसे कहीं भी पास की जानकारी भी नहीं ली गई यहां तक कि जब उनकी एंट्री शहर में हुई तो चेकिंग प्वाइंट पर कोई पुलिस कर्मचारी व अधिकारी मौजूद नहीं थे जो इस बात की एंट्री करें कि यह व्यक्ति किस शहर से आया है अगर हम बात करें तो सबसे ज्यादा युवा वर्ग मुंबई ,पुणे एवं अहमदाबाद से आया हुआ है जहां पर सबसे ज्यादा संक्रमण फैला है।
मैंने तो खुद ही फोन किया तो उन्होंने कहा हो जाओ होम क्वारंंटाइन
मुंबई से आए एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर का कहना है कि पहले तो उसने महाराष्ट्र से ईपास के लिए एप्लीकेशन दी जहां पर उसे बड़ी ही आसानी से उसकी रिक्वेस्ट अप्रूव कर ली गई परंतु जब इस रिक्वेस्ट के लिए उसने मध्य प्रदेश की वेबसाइट पर एप्लीकेशन दी तो 3 दिन बाद बड़ी मुश्किल से उसकी रिक्वेस्ट अप्रूव की गई जिसके लिए उसे कलेक्ट्रेट के लोगों से बात करनी पड़ी। जब वह अपना ही पास लेकर निकला तो वह मध्य प्रदेश पहुंचा जहां पर एंट्री प्वाइंट पर किसी ने उसका पास चेक नहीं किया जिसके बाद वह बड़ी दिलेरी से जबलपुर तक आ गया और जबलपुर में प्रवेश करते वक्त भी किसी ने पास पूछा ना उसका टेंपरेचर चेक किया। यह देखकर उसने 1 दिन बाद अपने घर आकर स्वयं से कंट्रोल रूम में फोन किया जहां से उसे जवाब मिला कि आप अपने घर में खुद ही क्वॉरेंटाइन हो जाओ अगर कुछ आपको लगता है तो आप विक्टोरिया जाकर चेक करवा दो अर्थात प्रशासन भी धीरे धीरे निष्क्रिय होता जा रहा है और आने वाले वक्त में यह अनदेखी कोरौना संक्रमण को अगले स्टेज में ले जाने का बढ़ावा दे रही है
प्रशासनिक अधिकारियों को भी डर
जैसा कि देखा गया शुरू में को संक्रमण मामलों में पुलिस अधिकारी और कुछ प्रशासनिकअधिकारी भी संक्रमित हुए, जिसके बाद अधिकारियों एवं कर्मचारियों वर्ग में भी एक डर का माहौल है और वह कहीं ना कहीं वह इस बात से डर रहे हैं कि यह करो ना इन्हें भी अपनी चपेट में ना ले ले जिसके बाद वह इस प्रकार के मामलों से अपनी दूरी बना रहे हैं
ईपास की अनिवार्यता समाप्त होते ही घटे आवेदन,
लॉक डाउन अवधि में रोजाना 500 से 1 हजार आवेदन तक आने लगे थे। इनमें एक से दूसरे जिले और राज्यों वाले आवेदन की संख्या ज्यादा थी। हालांकि आज की तरह ही पहले भी इंदौर,भोपाल,उज्जैन जिलों के लिए अनुमति नहीं दी गई। सिर्फ बाकी जिलों व राज्यों के लिए पास को स्वीकृत किया जा रहा था। आज की स्थिति में बमुश्किल किसी दिन 60 तो किसी दिन दिन 80।
चिकित्सकों ने स्क्रीनिंग में उसे स्वस्थ बताकर घर भेज दिया
कोरोनावायरस से संक्रमित बापूनगर रांझी निवासी 32 वर्षीय युवक ने बताया कि मुंबई से आने के बाद वह संस्थागत क्वारंटाइन में रहना चाहता था लेकिन विक्टोरिया अस्पताल के चिकित्सकों ने स्क्रीनिंग में उसे स्वस्थ बताकर घर भेज दिया था।युवक ने बताया कि वह मुंबई में सैलून का काम करता था। लॉकडाउन के कारण रोजगार ठप पड़ गया जिसके बाद उसने घर वापसी की तैयारी की। मुंबई से 4 हजार रुपये किराया देकर वह बस में सवार होकर 15 मई को जबलपुर आया। उसके साथ बस में प्रतापगढ़ उत्तरप्रदेश के 29 और लोग सवार थे। 15 मई की शाम शहर पहुंचने के बाद वह विक्टोरिया अस्पताल गया और चिकित्सकों से क्वारंटाइन में रखने के लिए कहा। स्क्रीनिंग के बाद चिकित्सकों ने बताया कि वह स्वस्थ है इसलिए होम क्वारंटाइन में रहे। रात में वह घर पहुंचा और अलग कमरे में रहने लगा। 16 मई को कुछ पुलिस वाले उसके घर पहुंचे और उसका हाल पूछकर चले गए। शाम को तहसीलदार घर आए तो उनसे भी संस्थागत क्वारंटाइन में रखने के लिए कहा, और वे आश्वासन देकर चले गए। उसके मुंबई से लौटने के बाद वह पिता व भाई समेत परिवार का कोई भी सदस्य घर से बाहर नहीं निकला था न किसी ने कोई काम किया था। 17 मई को तहसीलदार ने उसे रांझी स्थित छात्रावास में क्वारंटाइन करा दिया जहां से 22 मई को सैंपल जांच के लिए भेजे गए। 23 मई को उसकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई, जिसके बाद सुखसागर मेडिकल कॉलेज अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। युवक का कहना है कि यदि उसे 15 मई को ही संस्थागत क्वारंटाइन में रख दिया जाता तो वह घर नहीं जाता।

