रक्षाबंधन 2026: शास्त्रों के अनुसार कैसी होनी चाहिए आपकी राखी? जानें किस रक्षासूत्र का क्या है महत्व
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रक्षाबंधन 2026: शास्त्रों के अनुसार कैसी होनी चाहिए आपकी राखी? जानें किस रक्षासूत्र का क्या है महत्व
नई दिल्ली: रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पवित्र पर्व है, जो इस साल 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। बदलते दौर और बाजारवाद की चमक-धमक के बीच आज महंगी और डिजाइनर राखियों की भरमार है। हालांकि, शास्त्रों के अनुसार राखी की कीमत से अधिक उसके पवित्र भाव और रक्षासूत्र का महत्व होता है।
शास्त्रों के अनुसार राखी चुनने के मुख्य नियम और महत्व
तीन रंगों का संगम (त्रिदेव का प्रतीक): शास्त्रों में रेशम या सूती धागे से बनी राखी को सबसे शुभ माना गया है। पारंपरिक रूप से इसमें लाल, पीले और सफेद रंगों का प्रयोग किया जाता है, जिन्हें क्रमशः ब्रह्मा, विष्णु और महेश (त्रिदेव) से जोड़ा जाता है। तीनों रंग उपलब्ध न होने पर केवल लाल और पीले धागे का उपयोग भी किया जा सकता है।
चंदन युक्त रक्षासूत्र: चंदन को पवित्रता, शीतलता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसलिए चंदन से जुड़ा रक्षासूत्र भाई के जीवन में मंगल और खुशहाली लाता है।
रुद्राक्ष और तुलसी की राखी: रुद्राक्ष का संबंध भगवान शिव और तुलसी का संबंध भगवान विष्णु से माना जाता है। ऐसी राखियां भाई को आध्यात्मिक सुरक्षा प्रदान करती हैं।
साधारण मौली/कलावा भी सर्वश्रेष्ठ: रक्षाबंधन पर महंगी राखी खरीदना जरूरी नहीं है; एक साधारण मौली या कलावा भी पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ बांधा जा सकता है।
सोने-चांदी की राखी बांधने का तरीका: यदि आप सोने या चांदी की राखी बांधना चाहते हैं, तो पहले पारंपरिक रक्षासूत्र (कलावा) बांधें और उसके बाद ही धातु की राखी पहनाएं। ज्योतिष में सोने का संबंध सूर्य से और चांदी का संबंध चंद्रमा से होता है।