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यूक्रेन में फंसी कटनी की मेडिकल छात्रा

कटनी। रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के बीच कटनी की एक बेटी भी यहां फंसी हुई है। गल्र्स कॉलेज में पदस्थ लैब टेक्नीशियन  हेमलता सिंह की पुत्री सुनिधि यहां मेडिकल की पढ़ाई कर रही है।

गर्ल्स कॉलेज में पदस्थ लैब टेक्नीशियन मां ने शासन-प्रशासन से लगाई मदद की गुहार

छात्रा और उसकी मां ने शासन से मदद की गुहार लगाई है। हेमलता सिंह ने बताया कि उनकी बेटी सुनिधि सिंह यूक्रेन में टर्नोपिल नेशनल यूनिवर्सिटी में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है।

इस साल उसका यह तृतीय वर्ष है। वह 2019 में मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन गई थी और टर्नोपिल नेशनल यूनिवर्सिटी में एडमीशन लेकर यूक्रेन में हाउस नंबर 13, स्ट्रीट रसका बिल्डिंग 7 टर्नोपिल सिटी में भारत की ही दो अन्य छात्राओं के साथ एक मकान में किराए से रही है।

हेमलता सिंह ने बताया कि कल रात को उनकी सुनिधि से आखिरी बार बात हुई थी, इसके बाद से ही फोन नहीं लग रहा। सुनिधि ने अपनी मां को बताया था कि वह और उसकी दोनों सहेलियां डरी और सहमी हुई है। उन्हें कुछ भी समझ नहीं आ रहा कि इन कठिन परिस्थितियों वह किससे मदद की गुहार लगाएं। यहां इंडियन एम्बेसी से संपर्क करने पर भी कोई सहायता नहीं की गई। तीनों सहेलिया अपने घर के अंदर ही है। हेमलता सिंह ने बताया कि पिछले साल सितंबर में वह भारत आई थी और कटनी में कुछ दिन के लिए घर पर भी रुकी थी, इसके बाद वह वापस यूक्रेन चली गई, तभी से वह वहां पर है। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से ही यहां रहने वाले छात्र डरे और सहमे हुए हैं।

छात्रा ने वॉट्सअप कॉल के जरिए यशभारत से की बातचीत

मेडिकल छात्रा सुनिधि ने वॉट्सअप कॉल के जरिए यशभारत से बातचीत में बताया कि पिछले कुछ दिनों से यहां की स्थितियां काफी तनावपूर्ण बनी हुई है। रूस के हमले के बाद से ही यहां काफी दहशत का माहौल बना हुआ है। आसमान से कब कौन सा मिसाइल यहां गिर जाए, इसको लेकर लोग डरे हुए हैं। लोगों को अपने घरों के अंदर ही रहने के लिए कहा गया है लेकिन साफ-साफ नहीं बताया जा रहा है कि यह स्थितियां कब तक बनी रहेंगी। दूसरे देशों के लोगों को वतन वापसी के लिए भी कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। न्यूज चैनलों के माध्यम से ही जानकारियां मिल रही है। सुनिधि ने यह भी कहा कि यहां बड़ी संख्या में मेडिकल के छात्र हैं, जो पढ़ाई कर रहे हैं। सभी डरे और सहमे हुए है। यूक्रेन में रहने वाले छात्रों ने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम