Sunday, April 26, 2026
Latest:
अंतराष्ट्रीय

म्यांमार में सुरक्षा बलों की फायरिंग में तीन की मौत, तख्तापलट के खिलाफ प्रदर्शनों में अब तक 320 की मौत

यंगून, एजेंसी। म्यांमार के सुरक्षा बलों ने तख्तापलट का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर शुक्रवार को फिर फायरिंग की। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई। इस दक्षिण पूर्व एशियाई देश में गत एक फरवरी को हुए सैन्य तख्तापलट के खिलाफ शुरू विरोध प्रदर्शनों में अब तक 300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है।

व‌र्ल्ड बैंक ने म्यांमार से कहा- अशांति के चलते अर्थव्यवस्था में दस फीसद की गिरावट आ सकती है

इस बीच, व‌र्ल्ड बैंक ने म्यांमार को आगाह किया कि अशांति के चलते इस देश की अर्थव्यवस्था में दस फीसद की गिरावट आ सकती है। चश्मदीदों के अनुसार, दक्षिण म्यांमार के मएक शहर में सुरक्षा बलों ने काला झंडा दिखा रहे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसाई। सिर में गोलियां लगने से दो लोगों की मौत हुई।

प्रदर्शनकारी ने कहा- बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों के चलते तीसरे शव को उठा नहीं पाए

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘हम घटनास्थल से तीसरे शव को उठा नहीं पाए, क्योंकि वहां बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी मौजूद रहे। फायरिंग में कई लोग घायल भी हुए हैं।’

तख्तापलट के खिलाफ प्रदर्शनों में अब तक 320 लोगों की गई जान

इधर, प्रदर्शनकारियों एक समूह ने बताया कि गुरुवार रात भी नौ लोगों की जान गई थी। गत एक फरवरी से अब तक कुल 320 लोगों की मौत हुई है।

सेना ने एक फरवरी को सरकार का तख्तापलट कर सत्ता पर काबिज हो गई बता दें कि सेना गत एक फरवरी को नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) की सरकार का तख्तापलट कर सत्ता पर काबिज हो गई। तभी से अपदस्थ सर्वोच्च नेता आंग सान सू की सहित कई शीर्ष नेता हिरासत में हैं। सेना ने आंग सान पर रिश्वत लेने और अवैध रूप से संचार उपकरण आयात करने के आरोप लगाए हैं।

जम्मू में रोहिंग्यों की तत्काल रिहाई और म्यांमार प्रत्यर्पित की याचिका पर फैसला सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस नई याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया जिसमें जम्मू में हिरासत में लिए गए रोहिंग्या शरणार्थियों की तत्काल रिहाई और उन्हें म्यांमार प्रत्यर्पित करने के लिए किसी भी आदेश को लागू करने से केंद्र को रोकने की मांग की गई है। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी. रामासुब्रमणियन की पीठ ने विस्तार से दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता रोहिंग्या शरणार्थी मुहम्मद सलीमुल्लाह की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि रोहिंग्या बच्चों को मारा जा रहा है, उन्हें अपंग बनाया जा रहा है व उनका यौन शोषण हो रहा है और म्यांमार की सेना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का सम्मान करने में विफल रही है। वहीं, केंद्र की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह म्यांमार में व्याप्त समस्या प्रदर्शित कर रहे हैं।

जम्मू में रोहिंग्या शरणार्थी नहीं हैं

भूषण ने कहा कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने जम्मू में ऐसे रोहिंग्याओं को हिरासत में लिया है जिनके पास शरणार्थी कार्ड हैं और उन्हें जल्द ही प्रत्यर्पित कर दिया जाएगा। इस पर मेहता ने कहा कि वे शरणार्थी बिल्कुल नहीं हैं और यह याचिका का दूसरा दौर है क्योंकि इस अदालत ने पहले भी एक याचिका को खारिज कर दिया था जिसे एक रोहिंग्या ने ही दायर किया था।

Ashutosh Shukla

30 वर्षों से सकारात्मक पत्रकारिता का अनुभव