Monday, April 6, 2026
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मुस्लिम संगठन जमीयत की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, प्रेस पर नहीं लगाएंगे पाबंदी

नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी फैलने को हालिया निजामुद्दीन मरकज की घटना से जोड़कर कथित रूप से सांप्रदायिक नफरत और धर्माधता फैलाने से मीडिया के एक वर्ग को रोकने के लिए मुस्लिम संगठन जमीयत उलमा-ए-हिंद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कोई भी अंतरिम आदेश देने से इन्कार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा, ‘वह प्रेस पर पाबंदी नहीं लगाएंगे।’

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एल. नागेश्वर राव और जस्टिस एमएम शांतनागौदर की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने जमीयत की याचिका पर वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई करते हुए कहा कि इस मामले में भारतीय प्रेस परिषद को भी पक्षकार बनाएं। पीठ ने कहा कि वे इस समय याचिका पर कोई अंतरिम आदेश नहीं देंगे और मामले की सुनवाई दो सप्ताह बाद के लिए सूचीबद्ध कर दी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मीडिया का एक वर्ग दिल्ली में पिछले महीने आयोजित तब्लीगी जमात के कार्यक्रम को लेकर सांप्रदायिक नफरत फैला रहा है। जमीयत उलमा-ए-हिंद ने याचिका में फर्जी खबरों को रोकने और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का निर्देश केंद्र को देने का अनुरोध किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि तब्लीगी जमात की दुर्भाग्यपूर्ण घटना का इस्तेमाल सारे मुस्लिम समुदाय को दोषी ठहराने के लिए किया जा रहा है।

ज्ञात हो, दिल्ली के पश्चिमी निजामुद्दीन इलाके में स्थित तब्लीगी जमात मुख्यालय में पिछले महीने हुए धार्मिक कार्यक्रम में करीब नौ हजार लोगों ने शिरकत की थी और यह कार्यक्रम ही भारत में कोविड-19 महामारी का संक्रमण फैलने का एक मुख्य स्त्रोत बन गया क्योंकि इसमें हिस्सा लेने वाले अधिकांश व्यक्ति अपने धार्मिक कार्यो के सिलसिले में देश के विभिन्न हिस्सों में गए जहां वे अन्य लोगों के संपर्क में आए।

शीर्ष कोर्ट ने कहा, प्रेस परिषद को इस मामले में पक्षकार बनाएं

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि देश में कोरोना वायरस महामारी फैलने के संबंध में मीडिया की रिपोर्टिंग और सरकार की रिपोर्ट लगातार तब्लीगी जमात के बारे में ही बात कर रही हैं। इस पर पीठ ने कहा, ‘हम सोचते हैं कि आप भारतीय प्रेस परिषद को भी इस मामले में एक पक्षकार बनाएं। भारतीय प्रेस परिषद इस मामले में एक जरूरी पक्ष है। उन्हें पक्षकार बनाएं और इसके बाद हम सुनवाई करेंगे।’

खबरों के बारें करना चाहते हैं दीर्घकालीन उपाय

याचिकाकर्ता के वकील ने जब यह दावा किया कि मीडिया की खबरों की वजह से लोगों पर हमला हुआ है तो पीठ ने टिप्पणी की, ‘हम खबरों के बारे में ठोस दीर्घकालीन उपाय करना चाहते हैं। एक बार जब हम संज्ञान लेंगे तो लोग समझेंगे। यदि यह हत्या करने या बदनाम करने का मसला है तो आपको राहत के लिए कहीं और जाना होगा। लेकिन अगर यह व्यापक रिपोर्टिंग का मामला है तो प्रेस परिषद को पक्षकार बनाना होगा।’ याचिका में मीडिया के सभी वर्गों को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि वे शीर्ष अदालत के उन निर्देशों का सख्ती से पालन करें जिसमें यह सुनिश्चित किया जाए कि खबरें पूरी जिम्मेदारी के साथ दी जाएं और अपुष्ट खबरें संप्रेषित नहीं हों।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम