मनी लॉन्ड्रिंग केस में यासीन मलिक समेत 7 पर चलेगा मुकदमा: NIA की विशेष अदालत का आदेश, 19 नवंबर से दर्ज होंगे सबूत
नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक और छह अन्य आरोपियों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। एनआईए (NIA) की विशेष अदालत ने हवाला नेटवर्क के जरिए पाकिस्तान से विदेशी फंडिंग (Foreign Funding) लेने और मनी लॉन्ड्रिंग करने के मामले में ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया है। विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने शुक्रवार को निर्देश जारी करते हुए अभियोजन पक्ष (Prosecution) के सबूत दर्ज करने की प्रक्रिया 19 नवंबर से शुरू करने को कहा है।
तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी
सुनवाई के दौरान यासीन मलिक दिल्ली की तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए कोर्ट में पेश हुआ। मलिक ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि वह इस केस को लड़ेंगे। गौरतलब है कि सितंबर महीने में स्पेशल एनआईए कोर्ट ने यासीन मलिक समेत सभी आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत आरोप (Charges) तय करने का आदेश दिया था। मनी लॉन्ड्रिंग केस में यासीन मलिक समेत 7 पर चलेगा मुकदमा: NIA की विशेष अदालत का आदेश, 19 नवंबर से दर्ज होंगे सबूत
करीब ₹9 करोड़ की अवैध फंडिंग का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के अनुसार, इस पूरे मामले में अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) की राशि ₹8,94,87,639 (लगभग 8.95 करोड़ रुपये) पाई गई है। ईडी का आरोप है कि आरोपियों ने हवाला और अन्य संदिग्ध चैनलों के जरिए इस रकम को जुटाया, ट्रांसफर किया, छिपाया और अलगाववादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया। यह केस 2017 में एनआईए द्वारा दर्ज एफआईआर (यूएपीए और आईपीसी की गंभीर धाराओं) के आधार पर दर्ज किया गया था। मनी लॉन्ड्रिंग केस में यासीन मलिक समेत 7 पर चलेगा मुकदमा: NIA की विशेष अदालत का आदेश, 19 नवंबर से दर्ज होंगे सबूत
कौन-कौन हैं अन्य आरोपी?
इस केस में यासीन मलिक के अलावा 6 अन्य आरोपी शामिल हैं:
- ज़हूर अहमद शाह वटाली
- अब्दुल राशिद शेख (इंजीनियर राशिद)
- शब्बीर अहमद शाह
- नवल किशोर कपूर
- ट्राइसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड (कंपनी)
- मसरत आलम भट
पाकिस्तानी उच्चायोग और हवाला से आता था पैसा
जांच एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान से हवाला नेटवर्क के माध्यम से भारत में धन भेजा जाता था। बिचौलिये नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग (Pakistani High Commission) से नकदी प्राप्त कर हुर्रियत नेताओं तक पहुंचाते थे। इस पैसे का उपयोग जम्मू-कश्मीर में हिंसा भड़काने, पत्थरों से हमला कराने और अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया जाता था।
ईडी ने कोर्ट को बताया कि यासीन मलिक के ईमेल खातों से मिले सबूतों से साफ होता है कि उसने ‘आज़ादी’ के नाम पर जम्मू-कश्मीर में आतंक का नेटवर्क चलाने के लिए वैश्विक स्तर पर एक बड़ा सिस्टम बनाया हुआ था और इस फंड का इस्तेमाल उसके संगठन जेकेएलएफ (JKLF) को चलाने में भी हुआ।















