Monday, April 6, 2026
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भाजपा सरकार का सॉफ्टवेयर बढ़ा रहा कांग्रेस की मुश्किलें, 15 दिन बाद भी किसानों को भुगतान नहीं

भोपाल। भाजपा सरकार के कार्यकाल में किसानों को फसल का त्वरित भुगतान करवाने के लिए बनवाया गया जस्ट इन टाइम (जेआईटी) सॉफ्टवेयर किसानों की परेशानी का सबब बन गया है। 25 मार्च से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हुई थी। साढ़े सात लाख मीट्रिक टन गेहूं की बंपर खरीदी के बाद किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिल पा रहा है।

खरीदी के एक पखवाड़े के बाद सरकारी एजेंसियों ने अब 140 करोड़ रुपए के ऑनलाइन भुगतान की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन 20 करोड़ रुपए के भुगतान फेल हो गए। अब तक 1250 करोड़ रुपए से ज्यादा की खरीदी हो चुकी है पर किसान भुगतान के लिए परेशान हैं। लोकसभा चुनाव के ऐनवक्त किसानों को फसल का भुगतान जल्द न मिलना कांगेस सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ा रहा है। सरकारी एजेंसियां जिस सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रही हैं, वह भाजपा सरकार के कार्यकाल में बनाया गया था। धान खरीदी में इसकी वजह से पन्ना जिले के किसानों को करोड़ों रुपए का दो बार भुगतान हो गया था।

सवा लाख किसानों से खरीदा गेहूं

गुरुवार तक प्रदेश में एक लाख 17 हजार से ज्यादा किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदी की गई है। सहकारिता विभाग के सूत्रों के मुताबिक इसके बदले किसानों को 1250 से 1300 करोड़ रुपए का भुगतान करना है। विभाग की एजेंसियों ने इस बार निर्णय लिया कि सारा पेमेंट ऑनलाइन जेआईटी साफ्टवेयर से किया जाए पर त्वरित भुगतान के लिए बनाए गए इस साफ्टवेयर से भुगतान की प्रक्रिया ही खरीदी के 16 दिन बाद श्ाुरू हो पाई। इसमें करीब 15 हजार किसानों को डेढ़ सौ करोड़ का भुगतान किया गया है। खास बात ये है कि इस ऑनलाइन पेमेंट में दस फीसदी किसानों का ई-ऑर्डर फेल हो गया है। अब इन किसानों को भुगतान मिलने में और भी ज्यादा विलंब होगा। 

किसानों की गलत जानकारी से पेमेंट फेल

सहकारिता विभाग की जो एजेंसियां उपज की खरीद में लगी हैं। उन्होंने अपने मैदानी अमले से कहा कि जिन किसानों को ई-पेमेंट नहीं पहुंच पा रहा है, उनके बारे में दी गई जानकारी गलत होगी। इसमें किसानों के बैंक खाते का नंबर सही नहीं होगा या वो बंद होगा, आईएफसी कोड गलत होगा अथवा जनधन योजना का खाता होगा। 

किसानों का हक छीन रही प्रदेश सरकार

भारतीय जनता किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रणवीर सिंह रावत ने कहा कि पूर्ववर्ती शिवराज सरकार ने समर्थन मूल्य 1735 रुपए पर 265 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देकर 2000 रुपए के भाव से गेहूं खरीदा था। अब केंद्र ने एमएसपी 1,840 रुपए कर दिया है, लेकिन प्रदेश सरकार अब भी गेहूं 2000 रुपए के भाव पर ही खरीद रही है। 

तीन दिन में भुगतान का वादा अधूरा

रावत ने कहा कि कांग्रेस ने किसानों को उपज का भुगतान तीन दिन के भीतर करने की बात कही थी, लेकिन सिर पर बेटी की शादी की जिम्मेदारी होने के बावजूद किसानों को भुगतान नहीं किया जा रहा है। 

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Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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