jabalpur

बदहाल है शासकीय प्राथमिक बालक शाला

सरकारी स्कूल है या शासकीय टयूशन?

जबलपुर प्रतिनिधि । एक तरफ जहां शासकीय स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे है वही दूसरी ओर शीतलामाई स्थित शासकीय प्राथमिक बालक शाला में स्थिति ठीक इसके विपरीत दिखाई देती है। यहां कहने को तो 70 विद्यार्थियों के नाम रजिस्टर में दर्ज है, लेकिन स्कूल में बमुश्किल दस बच्चे दिखाई दे जाए तो गनीमत है। यहां अध्यापन कार्य में जुटे शिक्षक लगता है जैसे टाइम पास करने आते हैं तभी तो वे बच्चों को स्कूल आने के लिए उत्पे्ररक नहीं बन रहे हैं। जो बच्चे आते भी हैं तो उन्हें भी पढ़ाने की जहमत नहीं उठाते या यूं कहें कि खानापूर्ति करते है जबकि उन्हें तन्खवाह के रूप में मोटी रकम मिलती है। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए यहां तीन शासकीय शिक्षक अपनी सेवाए दे रहे है। इन हालातों के मद्देनजर यहां की शिक्षण व्यवस्था कैसी होगी इसका अंदाजा आप स्वंय लगा सकते है। पूर्व में यह विद्यालय पं भगवानदास शर्मा के नाम से जाना जाता था जहां बच्चों की संख्या भी पर्याप्त हुआ करती थी। लेकिन विद्यालय के आसपास के माहौल के चलते यहां विद्यार्थियों की संख्या लगातार घटती गई। वर्तमान हालत यह है कि स्कूल के नाम पर अब यहां महज खानापूर्ति की जा रही है। ऐसा नहीं है कि यहां के हालातों से अधिकारी वाकिफ ना हो, बावजूद इसके इन्होनें अपनी आंखें बंद की हुई है। नगर निगम इस स्कूल के संचालन में लाखों रुपय खर्च कर आवश्यक से सुविधाएं मुहैया कर रहा है। लेकिन निगम का ये प्रयास इसकी सार्थकता पर प्रश्र लगा रहा है। वही दूसरी तरफ यहां पदस्थ शिक्षकों की मौज है। ये शिक्षक यहां समय पर तो रोजाना आ जाया करते है। लेकिन स्कूल में पढ़ाई की जगह गप्प लड़ाते या अपने गृहकार्य करते नजर आते है।
कच्ची शराब बेचने वालों ने बिगाड़ी दशा
पूर्व में यह स्कूल सफलता के साथ संचालित होता था लेकिन धीरे-धीरे यहां की परिस्थितियां बदलती गई और स्कूल में अराजक तत्वों का अधिपत्य हो गया । कुछबंधिया मोहल्ला ठीक पीछे होने के कारण अवैध कच्ची शराब बेचने वाले अपनी अवैध शराब और महुआ लाहन को यहां छुपाया करते थे। इनकी इस हरकत का विरोध करने पर लोगों के साथ मारपीट तक हो जाया करती थी।
महापौर सुशीला सिंह के कार्यकाल में हुआ शाला का पुर्ननिर्माण
महापौर सुशीला सिंह और एमआईसी सदस्य व लोकनिर्माण विभाग संभाल रहे अभय सिंह ठाकुर के प्रयासों से शाला के जर्जर भवन की जगह बीस लाख की लागत से नयी इमारत बना दी गई। स्कूल के चारों ओर बाउण्ड्रीवॉल बन जाने से अराजक तत्वों पर अंदर तो अंकुश लग गया लेकिन बाहर के हालात यथावत रहे।
टॉयलेट कमोड तक चोरी
विद्यालय में आए दिन चोरियां होने से शाला के पदस्थ शिक्षक परेशान होते दिखाई देते है ये शातिर तत्व यहां लगे पंखें और बल्ब के साथ ही टॉयलेट के नलों की टोंटिया और टॉयलेट कमोड तक उखाड़कर ले जा चुके है। स्कूल प्रबंधन द्वारा इसकी शिकायत पुलिस से भी की गई लेकिन इस समस्या से निजात दिलाने पुलिस भी असहाय दिखाई देती है।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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