इंदौर। प्रदेशभर की कोर्टों में 9 से 15 अप्रैल तक कामकाज ठप रहेगा। राज्य अधिवक्ता परिषद के आव्हान पर एक लाख 10 हजार से ज्यादा वकील इस दौरान हड़ताल पर रहेंगे। वे प्रदेश में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने और हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। हड़ताल की वजह से प्रदेशभर की कोर्टों में चल रहे सवा 12 लाख से ज्यादा केसों की सुनवाई प्रभावित होगी।राज्य अधिवक्ता परिषद के कार्यकारिणी सदस्य सुनील गुप्ता, विवेक सिंह ने सोमवार को प्रेसवार्ता में बताया कि लंबे समय से वकील एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग कर रहे हैं। सरकार कई बार आश्वासन दे चुकी है लेकिन आज तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं हुई। वकीलों पर हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। वकीलों की सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा प्रभावी मसौदा तैयार होने के बावजूद कानून बनाए जाने में जानबूझकर देरी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने 2014 में वकील पंचायत बुलाकर कहा था कि राज्य में जल्दी ही इस एक्ट को लागू कर दिया जाएगा। गुप्ता ने बताया कि हाई कोर्ट में जजों के 53 पद स्वीकृत हैं, लेकिन केंद्र सरकार की उदासीनता की वजह से सिर्फ 33 जज ही पदस्थ हैं। इनमें से भी 5 इसी वर्ष रिटायर होने वाले हैं। हाई कोर्ट में लंबे समय से जजों की कमी बनी हुई है। इसका खामियाजा पक्षकार और वकीलों को भुगतना पड़ रहा है। सालों तक प्रकरण का निराकरण ही नहीं हो पाता। गुप्ता ने बताया कि राज्य अधिवक्ता परिषद ने वकीलों से आव्हान किया है कि 9 से 15 अप्रैल तक किसी कोर्ट में पैरवी न करें। इस वजह से प्रदेशभर की कोर्टों में काम नहीं होगा। सवा 12 लाख केस प्रभावित होंगे गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश की कोर्टों में सवा 12 लाख से ज्यादा केस लंबित हैं। इनमें से साढ़े 9 लाख आपराधिक केस हैं जबकि दिवानी मुकदमों की संख्या करीब पौने तीन लाख है। इसी तरह हाई कोर्ट की तीनों बेंच में लगभग ढाई लाख प्रकरण लंबित हैं। इनका निराकरण करने के लिए हाई कोर्ट में महज 33 जज हैं जिनमें से 5 इसी वर्ष रिटायर हो रहे हैं।