
प्रार्थना की जरूरत: दीपावली की सुबह से अभी तक टनल के अंदर है 40 मजदूर, इस हादसे को 80 घंटे से भी ज्यादा का समय बीत चुका उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सिलक्यारा टनल धंसने से फंसे 40 मजदूरों को बचाने की मुहिम लगातार जारी है. हालांकि, इस हादसे को हुए 72 घंटे से भी ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन फंसे मजदूरों को अब तक निकालने में सफलता नहीं मिल पाई है. इसी बीच मंगलवार को मंगलवार को टनल में फंसे एक मजदूर गब्बर सिंह ने अपने बेटे से वॉकी-टॉकी पर बात की. उन्होंने कहा कि सभी मजदूरों की जिम्मेदारी मुझ पर है. मैं सबको निकालने के बाद ही बाहर आऊंगा. बता दें कि गब्बर सिंह सुपरवाइजर भी हैं.
मजदूर ने की बेटे से बात
उत्तराखंड के ढह चुके टनल के अंदर फंसे गब्बर सिंह नेगी की पहचान उन 40 श्रमिकों में से एक के रूप में हुई है, जो अभी भी सुरंग के अंदर फंसे हुए हैं. नेगी ने अपने बेटे से फोन पर बात की और कहा कि वह और अन्य मजदूर सुरक्षित हैं. उनके पास पर्याप्त खाना और पानी है और वे बचाए जाने का इंतजार कर रहे हैं.
सभी मजदूर हैं सुरक्षित
नेगी के बेटे आकाश ने कहा कि मुझे उन पाइपों के माध्यम से अपने पिता से कुछ सेकंड के लिए बात करने की अनुमति दी गई थी, जिनके माध्यम से फंसे हुए श्रमिकों को ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है. उन्होंने कहा कि वे सुरक्षित हैं. उन्होंने हमें चिंता न करने को कहा, क्योंकि सभी मजदूरों के साथ हैं.
पुलिसकर्मियों ने दी इजाजत
दुर्घटनास्थल पर मौजूद आकाश के चाचा महाराज सिंह नेगी ने कहा कि हमें शुरू में पुलिसकर्मियों द्वारा अंदर फंसे लोगों से बात करने की अनुमति नहीं थी. जब मैंने इंस्पेक्टर को समझाया कि एक रिश्तेदार से सुनकर फंसे मजदूरों के साथ-साथ संबंधित परिवार के सदस्यों को भी राहत मिलेगी और उनके सुरक्षित बचाव की उम्मीद मजबूत होगी तो उन्होंने हामी भर दी और मैंने आकाश को उसके पिता से बात करने के लिए भेज दिया.
टनल की जा रही है साफ
अधिकारियों ने महाराज सिंह नेगी को चिंता न करने की जानकारी दी, क्योंकि सुरंग साफ हो गई है और उस वह उस जगह से 2 किलोमीटर दूर हैं, जहां मजदूर फंसे हुए हैं. बता दें कि 12 नवंबर रविवार की सुबह तड़के, ब्रह्मखाल-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सिल्कियारा-बड़कोट टनल का एक हिस्सा अचानक ढह गया, जिसमें लगभग 40 मजदूर अंदर फंस गए. इसके बाद तुरंत ही बचाव अभियान शुरू कर दिया गया.








