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पाठ्यपुस्तकों से सावरकर का अध्याय हटाने पर विवाद; पोते रंजीत ने सिद्धारमैया सरकार पर साधा निशाना

पाठ्यपुस्तकों से सावरकर का अध्याय हटाने पर विवाद; पोते रंजीत ने सिद्धारमैया सरकार पर साधा निशाना कर्नाटक के स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों से हिंदुत्व विचारत वी डी सावरकर के एक अध्याय हटाने के राज्य सरकार के फैसले पर उनके पोते रंजीत सावरकर ने प्रतिक्रिया दी है।

पत्रकारों से गोवा में एक इवेंट के दौरान बातचीत करते हुए रंजीत सावरकर ने कहा कि कांग्रेस को लगता है कि पुस्तक से एक अध्याय हटाने से वह छात्रों को सावरकर के बारे में जानने के अवसर से वंचित रख पाएंगे, लेकिन छात्र बहुत तेज हैं।

उन्होंने कहा- ‘सावरकर के बारे में बहुत सारे तथ्य सोशल मीडिया पर उपलब्ध है। सावरकर स्मारक ने उनका साहित्य अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित किया है। हम उन्हें कन्नड़ में भी प्रकाशित करेंगे।’

रंजीत सावरकर ने बताया कि अध्याय को हटाने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। उन्होंने कहा- ‘वास्तव में कहूंगा कि अगर आप उसे दबाने की कोशिश करोगे तो वह उतना उठने की कोशिश करेगा आएगा। यह एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है। प्रत्येक क्रिया की बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।’

कर्नाटक में कांग्रेसी सरकार ने गुरुवार को इस शैक्षणिक वर्ष के लिए राज्य में कक्षा छह से 10 की कन्नड़ और सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों के संशोधन को मंजूरी दे दी थी। इसके तहत आरएसएस के संस्थापक केबी हेडगेवर और सावरकर सहित अन्य अध्यायों को हटा दिया गया है।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम