यशभारत से खास बातचीत में बोले नरोत्तम मिश्रा- दिग्विजय की महत्वाकांक्षाओं ने डुबोई कांग्रेस की नैया
भोपाल (सूर्यकांत चतुर्वेदी)। प्रदेश में डेढ़ दशक तक रही भाजपा की सरकार में संकट मोचक की भूमिका निभाने वाले भाजपा के बरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा उन विरले नेताओं में शामिल हैं, जिनके पास हर समस्या का निदान होता है। फिर वो सत्ता का हो या संगठन का। यही वजह है कि उनकी कार्यप्रणाली पार्टी हाईकमान से लेकर उनके विरोधियों तक को को रास आती है। वैसे तो उनकी कर्मभूमि प्रदेश ही है, लेकिन जब भी संगठन को लगता है कि वह झंझावातों में उलझ रही है तब नरोत्तम मिश्रा को ही याद किया जाता है।
यही वजह है कि उन्हें उप्र जैसे पार्टी के लिए मुश्किल माने जाने वाले प्रदेश के उस अंचल की जि मेदारी दी गई जो सपा और बसपा के बीच हुए गठबंधन से बनी स्थिति से सत्ता की राह में बड़ा रोड़ा बन गया था। प्रदेश में कमलनाथ सरकार बनने के बाद वे उन नेताओं में शामिल रहे हैं, जिनके सदन में खड़ा होने पर सत्ता पक्ष मुश्किल में नजर आने लगता था। राज्य में चल रहे उठाफटक के बीच लोर टेस्ट से एक दिन पहले उनसे चर्चा की है हमारे स्थानीय संपादक सूर्यकांत चतुर्वेदी ने।
प्रश्रःसरकार के कार्यकाल का आपकी नजर में आंकलन क्या है खासकर किसान कर्जमाफी युवाओं को रोजगार, बेराजगारी भत्ता आदि पर।
उत्तरः कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से प्रदेश में अराजकता की स्थिति बनी हुई है। हालत यह है कि प्रदेश ला और आर्डर की स्थिति में पहुंच गया। एक किसान का भी दो लाख रुपए कर्ज माफ नहीं हुआ और न ही बोनस दिया जा रहा है। किसान परेशान है। कर्जमाफी के भरोसे बेचारा किसान ने कर्ज जमा नहीं किया और सरकार ने माफ नहीं किया, जिससे वह डिफाल्टर की स्थिति में आ गया है। यही नहीं अति वर्षा आदि से फसल नुकसान का भी मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। युवाओं की हालत भी खराब हुई है कांग्रेस ने वादा किया था कि वह बेरोजगारों को हर माह 4 हजार रुपए का बेरोजगारी भत्ता देंगे। लेकिन उसका अब तक कोई अता -पता नहीं है इतना ही नहीं अब तक के कार्यकाल में कमलनाथ सरकार भर्ती तक नहीं कर सकी है जिससे युवा परेशान हैं।
मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की स्थिति तो बेहद खराब है। कागजों में जमा राशि बढ़ाकर 51 हजार कर दी हैं, लेकिन बीते एक साल से किसी भी नवयुगल को राशि नहीं मिली है। इसके चलते अब वे कह रहे हैं कि भाजपा सरकार में भले ही राशि कम थी, लेकिन वह समय पर मिलती थी और ाटकना नहीं पड़ता था। हालात यह है कि मांग के अनुरूप राशि तक का प्रावधान सरकार नहीं कर रही है। यही वजह है कि प्रदेश में लगभग 30 हजार जोड़ों को 145 करोड़ राशि के लिए भटकना पड़ रहा है।
प्रश्रःप्रदेश की कानून व्यवस्था पर आपका क्या कहना है?
उत्तरः कानून व्यवस्था के मामले में प्रदेश की हालत बदतर हो चुकी है। फिरौती, लूट, बलात्कार की घटनाएं बढ़ी है। सरकार सिर्फ तबादलों में व्यस्त है जिससे इस तरह की गंभीर वारदातों पर रोक नहीं लग पा रही है। हालात यह है कि जब तक पुलिस अफसर अपने इलाके को पहचान कर अपराधियों पर नकेल कसना शुरू करता है तब तक उसका तबादला कर दिया जाता है। कई जगह तो एक पद पर दो-दो अफसर तक तैनात कर दिए गए हैं। बाद में विवाद के चलते एक को हटाना पड़ा।
प्रश्रःपूरे घटनाक्रमों में नरोत्तम मिश्रा को किस भूमिका में पाते हैं?
उत्तरः इस पूरे घटनाक्रम में मुझ पर व हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर जो आरोप लगे हैं, वे सरासर गलत हैं। गुटों में बटी कांग्रेस का भविष्य उसी दिन तय हो गया था जब कमलनाथ जी ने प्रदेश की बागडोर संभाली थी। दिग्विजय सिंह की अति महत्वाकांक्षाएं और कमलनाथ का राजैनतिक तौर पर अदूरदर्शी होना इस पूरे घटनाक्रम के लिए जि मेदार है। भाजपा शुरू से ही इस बात को लेकर आगाह करती रही की। कांग्रेस की सरकार अपने ही वजन से गिरेगी। यह सामने भी दिखाई दे रहा है। मैं पार्टी का एक कार्यकर्ता हूं। इस नाते से हमारी भूमिका एक कार्यकर्ता के तौर पर ही है।
प्रश्रःवर्तमान राजनैतिक परिदृश्य को कैसे देखते हैं?
उत्तरःमप्र की राजनैतिक फिजा में बदलाव कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के कारण हुआ है। उसके कमजोर होने से देश के युवा चेहरे ज्योतिरादित्य जी को प्रदेश के नेताओं ने हांसिए पर ढकेल दिया था और जिस तरह से उनके साथ सरकार व पार्टी में सलूक हुआ जिससे उन्हें इस तरह का फैसला लेने का मजबूर होना पड़ा। जनसेवा के लिए उन्होंने भाजपा में आकर काम करने का फैसला किया है।
प्रश्रःराजनैतिक संकट के बीच निगम मंडलों व आयोगों में की जा रही नियुक्तियों को कैसे देखते है?
उत्तरःमहामहिम राज्यपाल ने दस तारीख को ही सरकार के अल्पमत में होने की चिट्ठी लिखी थी। इसके बाद इस तरह की सरकार की बैठकों को घोर असंवैधानिक माना जाना चाहिए और इसके लिए पार्टी ने महामहिम को ज्ञापन सौंपकर आपत्ति जताई है। यही नहीं आयोगों में भी सरकार ने जल्दबाजी में नियुक्तियों कर दी हैं जो उचित नहीं है। हमारी सरकार बनने पर इनकी समीक्षा की जाएगी।
प्रश्रःकमलनाथ जी का दावा है कि उनकी सरकार प्रदेश को माफिया राज व शुद्ध के लिए युद्ध अभियान चला रही है जो भाजपा को अच्छा नहीं लग रहा है?
उत्तरःसरकार माफिया राज के अ िायान के बहाने से व्यक्तिगत दुश्मनी निकाल रही है। प्रशासन पर दवाब बनाकर कमलनाथ के मंत्री व कार्यकर्ता अवैध रेत उत्खनन सहित प्रदेश को तरह-तरह से लूटने में लगे हुए हैं। तबादला उद्योग देश व प्रदेश की जनता देख रही है और अधिकारी व कर्मचारियों के साथ ही उनके परिवार बेमौसम हो रहे तबादलों से परेशान हो रहे हैं। इस सरकार में न बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपया है।
प्रश्रःकांग्रेस के क्या कुछ विधायक और भाजपा में आ सकते हैं। सपा व बसपा विधायकों का भी समर्थन है क्या?
्रउत्तरःकांग्रेस की सरकार अपने ही वजन से गिरते दिख रही है ऐसे में दूसरा बड़ा दल होने के नाते भाजपा को जो करना जरूरी होगा वह किया जाएगा। कांग्रेस के विधायक दिग्विजय सिंह से नाराज हैं और यह पूरा देश दिख रहा है। कांग्रेस विधायक हमसे कनेक्ट नहीं थे, बल्कि कमलनाथ सरकार से डिस्कनेक्ट हुए हैं। कोई भाजपा की नीति रीति व राष्ट्रवाद से प्रेरित होकर पार्टी में आता है तो हम उसका खुले दिल से स्वागत करेंगे। रही बात सपा-बसपा की तो वह उनके विवेक पर निर्भर है। लेकिन पार्टी अपना संतुलन बिगड़ने देने के मूड में नहीं है?
प्रश्रःकांग्रेस कह रही है कि अविश्वास प्रस्ताव क्यों नहीं लाती भाजपा
उत्तरः अविश्वास प्रस्ताव का प्रश्न ही नहीं उठता चूंकि सरकार अपनों का ही विश्वास खो चुकी है। सरकार पर उसके ही मंत्रियों व विधायकों को ही विश्वास नहीं रहा है। ऐसे में सरकार को स्वयं आगे आकर विश्वासमत हासिल करना चाहिए, लेकिन सरकार ने नैतिकता ताक पर रख दी है और सरकार विश्वासमत हासिल करने से बचने के लिए तरह तरह के प्रयास कर रही है। सरकार को पता है कि अगर वह विश्वास मत हासिल करने जाती है तो उसका गिरना तय है। कांग्रेस की यह सरकार सत्र की अब तक की तानाशाह ओर भ्रष्टतम सरकार है। वैसे भी नैतिक मूल्य व कांग्रेस का कोई तालमेल नहीं है।
प्रश्रःदिग्विजय सिंह द्वारा बेंगलुरु में धरना व हाईकोर्ट में याचिका लगाने पर आप क्या करेंगे?
उत्तरः आगे क्या होगा खुदा जाने माचिस को भेजा है आग बुझाने। दिग्विजय सिंह को बंटाढार की उपाधि मिली हुई है उनके दस साल के कुशासन को लेकर प्रदेश में 15 साल भाजपा ने राज किया। उनके मार्गदर्शन में कमलनाथ सरकार ने जिस तरह शासन चलाया है उससे आने वाले 20 साल तक भाजपा की सरकार प्रदेश में तय हो गई है तब तक एक पीढ़ी बदल जाएगी।
प्रश्रःइन हालात के चलते क्या बजट पारित होना संभव है और 31 मार्च तक नहीं हो सका तो क्या परिस्थिति बनेगी?
उत्तरः 31 मार्च के पहले प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने की पूरी संभावना है। वैसे भी अल्पमत की सरकार वैसे भी बजट पास नहीं कर सकती है। वैसे भी तात्कालिक परिस्थिति के हिसाब से फैसले लिए जाते हैं। वैसे भी लेखानुदान के रूप में रास्ता खुला हुआ है।
प्रश्रःकांग्रेस का दावा है कि भाजपा के कई विधायक उनके संपर्क में हैं
उत्तरः हम तो अपने दल के 106 विधायकों की परेड राजभवन में करा चुके हैं, लेकिन कांग्रेस के जितने विधायक हैं वे भी पूरे एक साथ नजर नहीं आ रहे हैं। यही वजह है कि राजभवन सिर्फ 57 विधायक पहुंचे। इसी तरह से विधायक दल की बैठक में भी यह आंकड़ा कांग्रेस पूरा नहीं कर पा रही है।

