दलित आंदोलन के बीच ASP बीपी अशोक ने राष्ट्रपति को भेजा सशर्त इस्तीफा


हालांकि उन्होंने पत्र में आक्रोशित दलित युवकों से शांति की भी अपील की है. डॉ अशोक ने पत्र में लिखा है कि एससी-एसटी एक्ट को कमजोर किया जा रहा है.
हालांकि उन्होंने पत्र में आक्रोशित दलित युवकों से शांति की अपील भी की है. डॉ अशोक ने पत्र में लिखा है कि एससी-एसटी एक्ट को कमजोर किया जा रहा है. संसदीय लोकतंत्र को बचाया जाए. रूल ऑफ़ जज, रूल ऑफ़ पुलिस की जगह पर रूल ऑफ़ लॉ का सम्मान किया जाए.
उन्होंने आगे लिखा, महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व अभी तक नहीं दिया गया है. उच्च न्यायालयों में एससी, एसटी, ओबीसी और माइनॉरिटी महिलाओं को अभी तक प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका है. प्रमोशन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है. श्रेणी 1 से 4 तक इंटरव्यू युवाओं में आक्रोश पैदा करते हैं. सभी इंटरव्यू खत्म किए जाएं. जाति के खिलाफ स्पष्ट कानून बनाया जाए.
बसपा से रही है नजदीकियां
एएसपी अशोक बसपा से नजदीकियों को लेकर भी चर्चा में रहे हैं. हालांकि बसपा शासन में एएसपी सिटी लखनऊ (पूर्वी) के रूप में तैनाती के दौरान पत्रकारों से अभद्रता पर उन्हें निलंबित भी किया गया था. इस प्रकरण में पत्रकारों ने तत्कालीन सीएम मायावती के आवास पर देर रात तक हंगामा किया था.
इतना ही नहीं, बसपा शासन में अखिलेश यादव को गिरफ्तार कर इन्होंने खूब सुर्खियां बटोरी थी. डॉ.अशोक दलित मूवमेंट से जुड़े रहे हैं. उनके पिता व सेवानिवृत्त आईपीएस देवी प्रसाद अशोक भी बहुजन आन्दोलन से जुड़े रहे हैं. उन्हें कांशीराम का करीबी माना जाता था.








