Wednesday, April 8, 2026
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दर-दर भटकते बुजुर्ग प्रोफेसर, घमंड से चूर प्राचार्य भूल गये मानवता

जबलपुर ,नगरप्रतिनिधि। शहर के जाने माने महाविद्यालय साइंस कॉलेज लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। इस सुख-सुविधाओं से भरपूर कॉलेज में इतनी अव्यवस्थाएं सामने आ रही हैं, की जिनका एक बार में जिक्र कर पाना तक मुश्किल हो रहा है। सरकार द्वारा कॉलेज चलो अभियान के तहत कम से कम 200-300 स्कूलों में ब्रोशर बाँटना होता है। कॉलेज में 103 शिक्षकों के होते हुए भी प्राचार्य द्वारा सीनियर महिला शिक्षक (बुजुर्ग महिला) को इस काम के लिए चुना गया। अगर एक शिक्षक को 2-2 स्कूल भी जाने बोला जाता तो इस तरह की परेशानी एक बुजुर्ग महिला को नहीं झेलनी पड़ती। इस उम्र में इतनी गर्मी में एक सीनियर महिला शिक्षक को इस तरह से परेशान करना अमानवीय व्यवहार का प्रदर्शन है। अब सवाल यह उठता है कि प्राचार्य द्वारा इस तरह का व्यवहार किसी निजी दुश्मनी का कारण है या किसी प्रकार का दबाव है या पद का घमंड इस तरह चढ़ चूका है कि तानाशाही स्वंय दिखाई देती है।
नेक टीम के सामने प्रजेन्टेशन भी नही दे पाए थे प्राचार्य
सारी सुख-सुविधाओं से परिपूर्ण होने के बावजूद नैक एक्रीडिएसन  में मात्र ए ग्रेड प्राप्त करके यह कॉलेज पहले ही शहर को निराश कर चुका है, जो सरासर प्राचार्य और शिक्षकों की लापरवाही का परिणाम है।  प्राचार्य नैक टीम के सामने अंग्रेजी में बात करने और प्रेजेंटेशन देने तक में असमर्थ रहे फिर भी प्राचार्य ने मात्र 30 प्रतिशत अंक प्राप्त करने के लिए बिल्डिंग की साज-सजावट पर लाखों खर्च कर दिया। एक्रीडिएसन के बिलकुल पहले महाविद्यालय में रैंप बनवाये गये, टाइल्स लगवाई गयी और यहाँ तक की पूरा का पूरा व्हिकल स्टैंड बनवाया जिस पर लाखों रूपए (सरकारी पैसा) का खर्चा किया गया है। जो की सीधा-सीधा सरकारी पैसों को दुरूपयोग नजर आ रहा है। गत वर्ष इसी स्टैंड से अव्यवस्थाओं के चलते दिन-दहाड़े छात्रा की गाड़ी चोरी हुई थी। जिसे लेकर प्राचार्य ने आजतक आज तक किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की और छात्रा को किसी भी तरह का कोई सहयोग प्रदान नही किया गया। जबकि यह जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन की होती है।  यही नहीं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के विरुद्ध प्राचार्य द्वारा  झूठी एफ आई आर की गयी और धमकी भी दी गई। गौरतलब है कि सरकार के किसी भी अभियान के संचालन की आड़  में इस तरह का व्यवहार किसी भी प्राचार्य को शोभा नहीं देता। आखिर किसी भी पद की मर्यादा और प्रतिष्ठा का इतना तो ध्यान रखा जाना चाहिए कि इंसानियत शर्मसार न हो।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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