जूनियर डॉक्टर की आत्महत्या सहित दो मामलों में मानवाधिकार आयोग ने तलब की रिपोर्ट

जबलपुर। मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जैन ने मानव अधिकार हनन से जुड़े दो मामलों में संज्ञान लेकर राज्य के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा व जबलपुर मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक से रिपोर्ट तलब कर ली है।

एक मामला पांच सीनियर मेडिकल स्टूडेंट्स की प्रताड़ना से तंग आकर जूनियर डॉक्टर द्वारा आत्महत्या किए जाने से संबंधित है।
जबलपुर के नेताजी सुभाषचन्द्र बोस चिकित्सा महाविद्यालय में 26 वर्षीय पीजी डॉक्टर भगवत देवांगन द्वारा विगत माह पूर्व एक अक्टूबर को आत्महत्या कर लेने के मामले में पांच सीनियर्स के खिलाफ एफआइआर दर्ज हो चुकी है।

 

पांचों के खिलाफ भगवत के भाईयों ने जबलपुर शहर के गढ़ा थाने में लिखित शिकायत कर प्रताड़ना का आरोप लगाया था। मामले में मेडिकल कॉलेज के डीन को भी शिकायत की थी। एंटी रैगिंग कमेटी भी मामले में जांच कर रही है।

पुलिस के मुताबिक आर्थाे से पीजी कर रहे पांच सीनियर छात्र विकास द्विवेदी, अमन गौतम, सलमान, शुभम शिंदे, अभिषेक गेमे को आरोपित बनाया गया है। प्रकरण में धारा 306, 34 भादवि का मामला दर्ज किया गया है। दो अक्टूबर को भगवत देवांगन के बड़े भाई प्रहलाद और छोटे भाई देवी देवांगन ने गढ़ा थाने में इसकी शिकायत की थी।

पांचों आरोपित इंटरनेट मीडिया में भी उसे लेकर काफी आपत्तिजनक पोस्ट करते थे, उससे 24-24 घंटे की ड्यूटी लेते थे। उसके साथ आपत्ति जनक बर्ताव करते थे। उसे कई बार सजा के तौर पर मुर्गा बना देते थे। यहां तक कि उसके साथ मारपीट भी करते थे।

छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा के रहौद निवासी भगवत देवांगन ने जुलाई में पीजी आर्थाेपेडिक 2020 के प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया था। एमबीबीएस उसने पुणे स्थित मेडिकल कॉलेज से किया था। पांचों सीनियर छात्रों की प्रताड़ना से तनाव में आकर भगवत ने सितंबर में बड़ी मात्रा में दवाएं खा ली थी। इसके बाद वह एक महीने तक घर पर रहा, तब भी उसके मोबाईल पर सीनियर्स के आपत्तिजनक और हर्ट करने वाले मैसेज आते रहे।

25 सितंबर को वह जबलपुर लौटा था और एक अक्टूबर को दोपहर में मेडिकल कॉलेज हॉस्टल नम्बर-तीन में फंदा लगाकर झूल गया था। इस मामले में आयोग ने मुख्य सचिव, म.प्र. शासन, प्रमुख सचिव, म.प्र. शासन, स्वास्थ्य विभाग तथा नेताजी सुभाषचन्द्र मेडिकल कॉलेज, जबलपुर के अधीक्षक से एक माह में प्रतिवेदन मांगा है।

आयोग ने यह भी पूछा है कि मृतक के परिवार को क्या कोई कानूनी-आर्थिक मदद दी गई अथवा नहीं? आयोग ने पुलिस अधीक्षक, जबलपुर से भी प्रतिवेदन मांगकर पूछा है कि इस प्रकरण में आईपीसी की धारा 306 के तहत चार्जशीट दाखिल की गई है अथवा नहीं?

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