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टिकट दिया शुक्रवार का, गुरुवार को ही चली गई ट्रेन, भटकते रहे यात्री

त्रिलोचन महादेव के करनराज परिवार समेत यहां आए थे। इन्हें वडोदरा के लिए जाना था। काउंटर से टिकट लिया था, जिसपर 18 दिसंबर की तारीख अंकित है।

इसी तरह मऊ और वाराणसी के करीब 60 की संख्या में यात्री पहुंचे। यहां अलसुबह पहुंचे तो ट्रेन का पता नहीं था। यात्री इधर-उधर भटकते रहे। टिकट वापसी के लिए कभी आरक्षण केंद्र तो कभी पूछताछ काउंटर पर गए। निराश यात्रियों ने हंगामा किया।

यात्रियों का कहना था कि जब ट्रेन के दिन में बदलाव किया गया है तो सभी को जानकारी दी जानी चाहिए। निराश यात्री दोपहर बाद घर लौट गए।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम