ज्योतिरादित्य सिंधिया के जाल में फंसते नजर आ रहे हैं शिवराज
मुंगावली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों परीक्षा को लेकर देशभर के छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद किया. इस दौरान खरगोन की छात्रा युक्ति भाटे के एक सवाल का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘युद्ध का नियम है कि दुश्मन को अपने मैदान में खींच कर लाओ और तब मारो.’ मध्य प्रदेश में सत्ता के सेमीफाइनल यानी कोलारस और मुंगावली विधानसभा सीट पर उपचुनाव के मौजूदा हालात को देखते हुए कांग्रेस के क्षत्रप ज्योतिरादित्य सिंधिया और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर यह बात सटीक बैठती हुई नजर आ रही है. सिंधिया ने शिवराज को अपने ही गढ़ में चुनावी बाजी में पूरी तरह से घेर लिया है.
दरअसल, मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र में आने वाली अशोक नगर जिले की मुंगावली और शिवपुरी जिले की कोलारस विधानसभा सीट पर 24 फरवरी को मतदान होना है. मुंगावली में मुकाबला कांग्रेस के ब्रजेंद्र सिंह यादव और भाजपा की बाई सिंह यादव के बीच है, जबकि कोलारस में कांग्रेस के महेंद्र सिंह यादव को भाजपा के पूर्व विधायक महेंद्र जैन चुनौती दे रहे हैं.
सिंधिया बनाम शिवराज
दोनों ही जगहों पर उम्मीदवार पीछे छूट गए हैं और लड़ाई ज्योतिरादित्य सिंधिया बनाम शिवराज सिंह चौहान के बीच केंद्रित हो गई है. उपचुनाव जीतने में बाजीगर माने जाने वाले शिवराज सिंह चौहान के साथ उनके मंत्रिमंडल की पूरी फौज ने दोनों विधानसभा में डेरा जमा दिया है. कई विधायक और पार्टी के सीनियर लीडर व केंद्रीय मंत्री भी यहां का दौरा कर चुके है. यहां तक की यशोधरा राजे सिंधिया को दरकिनार करने वाली पार्टी उन्हें फोकस में रखकर प्रचार में जुटी है.
जातिगत समीकरण को साधने से लेकर चुनाव से पहले हर मांग पर हामी भरकर मतदाताओं का दिल जीतने की कवायद में जुटे शिवराज सिंह चौहान के लिए फिर भी दोनों ही विधानसभा क्षेत्र में परचम लहराना आसान नजर नहीं आ रहा है. राजनीति के जानकारों से लेकर भाजपा के गलियारों में चर्चा है कि शिवराज सिंह चौहान इन चुनावों में घिर गए है.
सिंधिया का बदला हुआ अंदाज
कांग्रेस सांसद सिंधिया ने बड़ी चतुराई से इस लड़ाई को अपने बनाम पूरी शिवराज सरकार में बदल दिया है. मुंगावली में महेंद्र सिंह कालूखेड़ा और कोलारस में रामसिंह यादव के निधन के बाद से ही सिंधिया ने इस पूरे इलाके में अपनी जमावट शुरू कर दी थी. मोदी लहर के बावजूद सिंधिया 2014 के लोकसभा चुनाव में अपना गढ़ बचाने में कामयाब रहे थे. ऐसे में अब देश की राजनीति में हवा के बदलते रुख में सिंधिया का अंदाज भी बदला हुआ नजर आ रहा है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को सिंधिया अपने गढ़ में चक्रयूव्ह में घेरते हुए नजर आ रहे है.
शिवराज का राजनीतिक कौशल दांव पर लगा
मुख्यमंत्री यूं तो पिछले दो महीनों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने मुंगावली और कोलारस का लगभग हर गांव नाप लिया है. मुख्यमंत्री आमतौर पर दौरे के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इन उपचुनाव में मतदाताओं से सीधे संपर्क के लिए उन्होंने सुविधायुक्त रथ का सहारा लिया है.
दोनों विधानसभा सीट पर शिवराज का राजनीतिक कौशल दांव पर लगा हुआ है. मतदाताओं से सीधा संवाद कर अपनेपन का रिश्ता कायम करने वाले शिवराज को भी इस बात का अहसास है और उनके चुनावी भाषण में वह साफतौर पर झलक भी रहा है.
राजनीति के जानकार ऐसे बयानों में मुख्यमंंत्री की बेबसी देख रहे हैं. अमूमन भाषणों में ‘लाड़ली लक्ष्मी’ से लेकर ‘मुख्यमंत्री तीथदर्शन योजना’ की उपलब्धियां गिनाने वाले शिवराज की जुबां पर अब सिंधिया का विरोध ज्यादा मुखर नजर आ रहा है. उनकी बॉडी लैंग्वेज और मतदाताओं को मनाने की हरसंभव कोशिश बताती है कि वो सिंधिया के गढ़ में घिर गए है.
भाजपा के लिए रणनीतिक चूक..!
कोलारस और मुंगावली विधानसभा क्षेत्र के पिछले विधानसभा आम चुनाव में कांग्रेस जीती थी. सूबे में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले दोनों राजनीतिक पार्टियों में सीधी टक्कर है. ऐसे में सिंधिया की बतौर मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट होने की दावेदारी को खत्म करने के लिए भाजपा ने इस लड़ाई को सिंधिया बनाम शिवराज बना दिया. लेकिन भाजपा के लिए यह रणनीतिक चूक जैसा नजर आ रहा है.

