मध्यप्रदेश

जो टिकट के दौड़ में थे, उन्हें संगठन में संगठन में पद देकर चुप कराया

ग्वालियर। कांग्रेस में टिकट की मारामारी के बीच संगठन में नियुक्तियां कर दी गईं। इसमें ऐसे नेताओं को संगठन में प्रदेश सचिव, महासचिव जैसे पद दिए हैं जो टिकट की दौड़ में हैं। नियुक्तियां इसलिए चर्चा में आ गई हैं क्योंकि प्रदेश कांग्रेस कमेटी तक को इसकी सूचना नहीं है। जिन्हें पद दिए हैं उनमें से कुछ तो टिकट के लिए दिल्ली में डेरा जमाए हैं। इधर प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने गोपनीय सर्वे के लिए एक टीम ग्वालियर भेज दी है। यह हालात कांग्रेस में फिर गुटबाजी को हवा दे रहे हैं।

प्रदेश प्रभारी ने जारी किए नियुक्ति-पत्र

शहर जिला कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक शर्मा तथा युवा कांग्रेस जिला ग्रामीण के पूर्व अध्यक्ष दर्शन सिंह कुशवाह को प्रदेश महासचिव और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव आशीष प्रताप सिंह राठौड को प्रदेश सचिव बनाया गया है। यह नियुक्तियां प्रदेश कांग्रेस कमेटी(पीसीसी) के बजाए आल इंडिया कांग्रेस कमेटी(एआईसीसी) के महासचिव व प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया के हस्ताक्षर से की गई हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को सूचना भर दी गई है। अभी तक पीसीसी को इन नियुक्तियों की जानकारी तक नहीं है। नियुक्ति-पत्र भी व्यक्तिगत भेजे गए हैं, कोई सूची जारी नहीं की है। 13 अक्टूबर को नियुक्तियां किए जाने का उल्लेख है, लेकिन नेताओं और जिला कांग्रेस को यह पत्र एक दिन पहले ही मिले हैं।

जिलाध्यक्ष ने की घोषणा

जिन्हें संगठन में जिम्मेदारी दी है उन्हें व्यक्तिगत तौर पर नियुक्ति-पत्र भेजे गए हैं। मंगलवार को शहर जिलाध्यक्ष डॉ.देवेन्द्र शर्मा ने मीडिया को बुलाकर यह जानकारी दी। जबकि प्रदेश कमेटी में पदाधिकारियों को नियुक्त करने की सूचना प्रदेश कमेटी देती है या फिर सूची जारी की जाती है। इससे पहले प्रदेश के संगठन प्रभारी चन्द्र प्रभाष शेखर के हस्ताक्षर से सूची जारी की गई थी, व्यक्तिगत नियुक्ति-पत्र जारी नहीं किए गए थे। उसमें जिले से अशोक सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष, मदन कुशवाह को महासचिव तथा सुनील शर्मा को सचिव बनाया गया था। जिलाध्यक्ष डॉ.शर्मा ने बताया कि एक दिन पहले ही उन्हें तीनों पदाधिकारियों को नियुक्त किए जाने की सूचना मेल से मिली है। मीडिया से चर्चा के समय अशोक शर्मा और आशीष थे।

इसी समय क्यों याद आई

पदाधिकारी बनाए जाने पर राजनीतिक गलियारे में कई तरह की चर्चाएं चल निकली हैं। क्योंकि दर्शन सिंह कुशवाह और आशीष प्रताप सिंह ग्वालियर दक्षिण तथा अशोक शर्मा ग्वालियर विधानसभा से टिकट मांग रहे थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जयविलास पैलेस में चर्चा के समय अशोक शर्मा और दर्शन सिंह को बुलाया था। राजनीतिक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि तीनों को पद देकर टिकट की लाइन से हटा दिया है। उनकी नाराजगी दूर करने प्रदेश संगठन में जगह दी है। उन्हें साधने की चर्चा इसलिए भी है क्योंकि इसी समय यह नियुक्ति क्यों की गई हैं। जबकि दो साल से जिलों की नई कार्यकारिणी गठित नहीं की जा सकी है।

दिल्ली में डेरा

टिकट के लगभग सभी दावेदार दिल्ली दरबार में डटे हैं। कोई सिंधिया के बंगले पर बैठा है तो कोई कमलनाथ, दीपक बावरिया, अरुण यादव को साधने में जुटा है। सिंधिया बैठकों में शामिल होने आ-जा रहे हैं, परन्तु दावेदारों से कोई चर्चा नहीं कर रहे हैं।

कमलनाथ ने गोपनीय सर्वे के लिए भेजी टीम

उधर दिल्ली में टिकटों पर मंथन चल रहा है, इधर प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने चार सदस्यीय टीम शहर में गोपनीय सर्वे के लिए भेज दी है। जितेन्द्र सिंह कोचर पर्यवेक्षक के रूप में सोमवार से यहां डटे हैं। वे गोपनीय स्तर पर दावेदारों की जमीनी हकीकत की नब्ज टटोल रहे हैं। मंगलवार को वे शिन्दे की छावनी कांग्रेस कार्यालय पहुंचे और दावेदारों के नाम, पते व फोन नंबर ले आए। दावेदारों के संबंध में उन्होंने कुछ कांग्रेसियों के साथ ही जनता के बीच जाकर चर्चा भी की है।

इनका कहना है

पदाधिकारियों की नियुक्ति की हमें कोई जानकारी नहीं है। हमें अभी तक सूची नहीं मिली है – चन्द्र प्रभाष शेखर, प्रदेश संगठन प्रभारी

मुझे जानकारी नहीं

किसे पदाधिकारी बनाया है, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। आप चन्द्र प्रभाष जी से जानकारी ले लें – पंकज चतुर्वेदी, प्रवक्ता प्रदेश कांग्रेस

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