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इसरो ने लॉन्च की GSAT-6A कम्युनिकेशन सैटेलाइट, मोबाइल क्रांति में अहम

चेन्नई: तमिलनाडु के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से 2140 किलोग्राम वजनी एस बैंड संचार उपग्रह जीसैट-6ए लेकर जाने वाले जीएसएलवी-एफ08 रॉकेट का आज लॉन्च कर दिया गया। यहां से 110 किमी दूर श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष स्टेशन से यह उपग्रह इसरो के जीएसएलवी-एफ 08 रॉकेट से प्रक्षेपित किया गया। कक्षा में स्थापित होने के बाद यह 10 साल तक काम करेगा। जीसैट-6ए न सिर्फ इसरो के लिए बल्कि देश की सेनाओं के लिए भी काफी अहम है और इसकी सफल लॉन्चिंग इसरो के लिए एक और मील का पत्‍थर माना जाएगा।

रॉकेट का वजन 415.6 टन है। यह जीएसएलवी की 12वीं उड़ान होगी और स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन के साथ छठी उड़ान होगी। उड़ान भरने के 17 मिनट बाद इसके साथ गया उपग्रह इससे अलग हो जाएगा तथा 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर भू-स्थैतिक कक्षा में स्थापित हो जाएगा।

आई-2के बस: इसे इसरो ने ही बनाया है। यह सैटेलाइट को 3119 वॉट पावर देता है।
एंटीना: छह मीटर व्यास वाला। सैटेलाइट में लगने वाले सामान्य एंटीना से तीन गुना चौड़ा है।
एस-बैंड: यह मोबाइल की 4-जी सर्विस के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह मौसम की जानकारी देने वाले रडार, शिप रडार, कम्युनिकेशन सैटेलाइट में भी इस्तेमाल होता है।

क्या होगा फायदा?
– मोबाइल कम्युनिकेशन में मदद करेगा। इसे सेना के इस्तेमाल के हिसाब से भी डिजाइन किया गया है।

GSLV रॉकेट की खासियत
– 12वीं उड़ान है इस रॉकेट की
– 6वीं उड़ान है इंडीजीनियस क्रायोजेनिक अपर स्टेज की।
– 49.1 मीटर ऊंचाई है जीएसएलवी-एफ08 की।
– 4156 क्विंटल वजन है। (4 रेल इंजन बराबर

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