मध्यप्रदेश

जिम्मेदारों को खबर नहीं, स्कूलों ने बढ़ा ली फीस

भोपाल । निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए सरकार ने फीस नियामक आयोग भले ही बना दिया हो, लेकिन इस शैक्षणिक सत्र में अभिभावकों को इसका लाभ नहीं मिल सका। न अब तक स्कूलों की फीस बढ़ोतरी पर नजर रखने वाली समिति बनी न ही जिम्मेदारों को अब तक इस आयोग और इसके नियमों की जानकारी मिल सकी है।

उधर, सीबीएसई ने उसके अधीन संचालित स्कूलों के लिए गाइडलाइन तो बना दी है पर उसके पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई का अधिकार नहीं है। राज्य शासन ने भले ही 10 प्रतिशत से ज्यादा ट्यूशन फीस नहीं बढ़ाने की गाइडलाइन जारी कर दी लेकिन स्कूलों के पास अब तक इस तरह का कोई आदेश नहीं पहुंचा है।

इसकी आड़ में स्कूलों ने मनमाने तरीके से ही फीस बढ़ा दी है। अभिभावकों के मुताबिक कई स्कूलों में 10 से 16 फीसदी से ज्यादा फीस बढ़ गई है। ट्यूशन फीस के साथ-साथ बस, वार्षिक शुल्क, भोजन, लाइब्रेरी, खेल, गतिविधि के नाम पर बढ़ोतरी कर दी गई है। हालात यह हो गए कि कई स्कूलों में नर्सरी की फीस 1 लाख रुपए से अधिक हो गई है।

फीस नियंत्रण पर सीबीएसई को अधिकार नहीं : फीस नियंत्रण से लेकर बच्चों की सुरक्षा तक के मामलों में सीबीएसई ने गाइडलाइन तो जारी की है, लेकिन उसके पास कोई अधिकार नहीं है। स्कूल सिर्फ मान्यता, पाठ्यक्रम और शिक्षकों की योग्यता के संबंध में उसके निर्देशों का पालन करते हैं। सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों को राज्य शासन के मापदंडों का पालन करना चाहिए। जहां तक फीस का सवाल है तो स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर, सुविधा, पाठ्यक्रम ,गतिविधियों के आधार पर तय कर सकता है। सीबीएसई का सिर्फ इतना मानना है कि अनावश्यक फीस न बढ़ाएं।

पहले ही बढ़ा दी फीस : इधर, राज्य शासन ने पिछले पांच साल से कागजों में चल रहे फीस नियामक आयोग को फरवरी 2018 में लागू कर दिया है। इसमें स्कूलों को 10 फीसदी से ज्यादा ट्यूशन फीस नहीं बढ़ाने का नियम है। लेकिन सीबीएसई स्कूलों का नया फीस स्ट्रक्चर अभिभावकों तक पहुंच चुका है। इसमें ट्यूशन फीस के अलावा अन्य मदों में भी बढ़ोतरी की गई है। इधर, स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि हमारे पास तो अब तक शासन का ऐसा कोई आदेश नहीं पहुंचा है।

पालकों को शामिल नहीं करते

अभिभावक जितेंद्र पारवानी का कहना है कि शासन ने नियामक आयोग लागू कर दिया, लेकिन अब भी स्कूल मनमानी कर रहे हैं। फीस निर्धारण में पालकों को भी शामिल करना चाहिए।

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कार्रवाई का डर नहीं होने से स्कूल आजाद

अभिभावक विनोद दुबे का कहना है कि हर बार की तरह इस बार भी अभिभावक फीस वृद्धि के बोझ तले दब गए हैं। कानून तो बहुत बन गए, लेकिन कार्रवाई का अधिकार नहीं होने से स्कूल मनमानी करने के लिए आजाद हैं।

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गाइडलाइन का अध्ययन नहीं किया है

फरवरी में फीस नियामक कानून के संबंध में कुछ गाइडलाइन आई है पर अभी उसका अध्ययन नहीं हो पाया है। फिलहाल किसी स्कूल में फीस वृद्धि की शिकायत भी नहीं मिली है। शिकायत मिली तो अध्ययन कर स्कूलों पर उचित कार्रवाई करेंगे। -निशांत वरवड़े, कलेक्टर

प्रशासन को निर्देश जारी किए जा रहे हैं स्कूलों पर निगरानी रखने के लिए प्रशासन स्तर पर कमेटी तो पहले से बनी हुई है अब उसे नए शुल्क नियामक आयोग के मापदंडों के मुताबिक जांच करना है। जहां भी जरूरत से ज्यादा फीस वृद्धि हुई है उस पर दंडात्मक कार्रवाई करना है। अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो प्रत्येक जिलों में इसके निर्देश जारी किए जाएंगे। सभी स्कूलों में शुल्क नियामक आयोग की गाइडलाइन भी जारी की जाएगी। दीपक जोशी शिक्षा राज्य मंत्री, मप्र

स्कूलों में नहीं पहुंची गाइडलाइन फिलहाल स्कूलों में राज्य शासन का फीस नियामक कानून का प्रपत्र नहीं पहुंचा है। लेकिन स्कूल ने कानून के दायरे में रहकर ही फीस वृद्धि करने की कोशिश की है। सहोदय सिर्फ अकादमिक व्यवस्था बनाए रखने में मध्यस्थता करता है, फीस के संबंध में नहीं। सभी स्कूल को सुविधाओं के आधार पर अपनी फीस तय करने का अधिकार है।

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