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जनवरी से वित्त वर्ष, सबसे पहले घोषणा कर पीछे हटी मप्र सरकार

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भोपाल। वित्त वर्ष का समय अप्रैल-मार्च से बदलकर जनवरी-दिसंबर करने की देश में सबसे पहले राज्य के तौर पर घोषणा करने वाली मध्य प्रदेश सरकार ने फिलहाल इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है.

प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया ने बताया, ‘हम वित्त वर्ष के चक्र को जनवरी 2018 से बदलने नहीं जा रहे हैं. हम वित्त वर्ष को जनवरी से दिसंबर तक करने के नए फार्मेट को तब लागू करेगें जब केन्द्र इसे लागू करेगा. पहले केन्द्र को इस नये फार्मेट जनवरी से दिसंबर को लागू कर लेने दीजिए.’

प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री और सरकार के प्रवक्ता नरोत्तम मिश्रा ने दो मई को कैबिनेट की बैठक के बाद कहा था, कैबिनेट बैठक में वित्त वर्ष का समय बदलकर जनवरी-दिसंबर करने का फैसला लिया गया है. इसलिए अगले वित्त वर्ष का बजट सत्र दिसंबर-जनवरी में होगा.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नीति आयोग की संचालन परिषद की बैठक में कहा था कि वित्त वर्ष मौजूदा एक अप्रैल से 31 मार्च के बदले एक जनवरी से 31 दिसंबर करने के सुझाव आए हैं. इसके कुछ दिनों बाद ही मध्य प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष का समय बदलने की घोषणा की थी.

मिश्रा ने वित्त वर्ष 2017-18 के बारे में पूछने पर कहा था कि हम इस साल दिसंबर तक वर्तमान वित्त वर्ष की व्यवस्था खत्म करने की कोशिश करेंगे. इसलिए अगला बजट या तो इस साल दिसंबर में पेश किया जाएगा या अगले साल जनवरी में.

वित्त वर्ष के समय में बदलाव कर जनवरी से दिसंबर करने का मतलब है कि कर निर्धारण वर्ष में बदलाव करना, बुनियादी व्यवस्था में बदलाव, विशेषकर कंपनी के स्तर पर करने से है.

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