धर्म

जगन्नाथ रथयात्रा : छुट्टियां मनाने मौसी के घर जाते हैं भगवान

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा ओडिशा के जगन्नाथ पुरी मंदिर का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण आयोजन है। यह विश्वप्रसिद्ध यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को शुरू होती है और आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को इसका समापन होता है। इस उत्सव के लिए पुरी नगर देश भर के कृष्ण भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है। जगन्नाथपुरी का वर्णन स्कन्द पुराण के साथ-साथ नारद पुराण में भी किया गया है।

जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत के स्वामी होता है। 12वीं शताब्दी में बने श्री जगन्नाथ मंदिर के सामने लकड़ी से बने तीन विशाल रथ सजा-धजा कर खड़े किए जाते हैं, जिन्हें हजारों लोग मोटी-मोटी रस्सियों से खींचते है। तीनों रथ भगवान जगन्नाथ, भाई बलरामजी और उनकी बहन सुभद्राजी के होते हैं। रथ यात्रा उत्सव 9 दिनों तक चलता है

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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