मध्यप्रदेश

चुनावी समर में ऐलान के बाद सपाक्स में फूट : ओबीसी नेताओं ने खुद को किया अलग, बनाई अलग रणनीति

इंदौर। राजनीतिक दल के तौर पर प्रदेश के चुनावी समर में कूदने के ऐलान के बाद कांग्रेस सपाक्स के खिलाफ हो गई है। कांग्रेस ने सपाक्स पर भाजपा के फायदे के लिए काम करने का आरोप लगा दिया है। पिछड़ा वर्ग के नेताओं ने भी सपाक्स से खुद को अलग बताते सपाक्स का नेतृत्व स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। सपाक्स के विरोध में गुरुवार को इंदौर में एक के बाद एक तीन पत्रकार वार्ताएं हुईं। कांग्रेस के प्रदेश सचिव राकेशसिंह यादव ने सुबह आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विस में जीत के लिए जातिगत भेदभाव फैला रही है। सपाक्स व अजाक्स दोनों को ही सीएम ठग रहे हैं।

पहले मुख्यमंत्री ने कहा था कि आरक्षण खत्म होगा न एससी-एसटी वर्ग की सुरक्षा के लिए बना कानून कमजोर होगा। अब सपाक्स नेताओं से वादा कर लिया है कि एसटी-एसटी एक्ट में चुनाव के बाद संशोधन का पत्र मप्र की ओर से केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। मप्र ओबीसी पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने पत्रकार वार्ता लेकर सरकार पर पिछड़ा वर्ग को धोखे में रखने का आरोप लगाया। प्रदेश महासचिव दीपक मलौरिया ने कहा कि सपाक्स ओबीसी का प्रतिनिधित्व नहीं करते। सरकार ने मप्र में ओबीसी का 27 प्रश आरक्षण लागू नहीं किया है। हमें सिर्फ 12 प्रश आरक्षण दिया जा रहा है। अब ओबीसी व दलितों के आरक्षण को ताक पर रखा जा रहा है।

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