FEATUREDHealthLatestफिटनेस फंडा

चिकनगुनिया डेंगू आउटब्रेक की आशंका, जिला अस्पताल में होगी मैकएलाइजा की जांच

सागर। प्रदेश में एक बार फिर डेंगू का खतरा मंडराने लगा है। बारिश का सीजन शुरू होते ही सागर के आसपास के इलाकों में डेंगू की आशंका भी बढ़ गई है। पड़ोसी जिले दमोह में डेंगू के आउटब्रेक की आशंका और तीन मरीजों की बुखार के दौरान मौत होने के बाद सागर सहित संभाग को अलर्ट पर रखा गया है। सागर बीएमसी से विशेषज्ञों की एक टीम दमोह भेजी गई है। बीएमसी और जिला अस्पताल में अलग से डेंगू वार्ड बनाए गए हैं।

machchhar

बारिश का सीजन शुरू होते ही सागर जिले में एक बार फिर डेंगू, चिकगुनिया और स्वाइन फ्लू का खतरा मंडराने लगा है। चूंकि जिले में पिछले तीन-चार सालों में डेंगू के हजारों पॉजीटिव केस सामने आ चुके हैं। दर्जनों मौतें भी हो चुकी हैं, इस कारण प्रशासन पहले से ही अलर्ट हो गया है। स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया विभाग के माध्यम से जिलेभर में डेंगू व चिकनगुनिया के मद्देनजर मच्छरों का लार्वा सर्वे शुरू करा दिया है। कई जगह लार्वा मिला है। हालांकि जिले से अभी तक डेंगू का कोई केस सामने नहीं आया है।

मेडिकल कॉलेज-जिला अस्पताल में खुले डेंगू वार्ड

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में पिछले दिनों अलग से डेंगू वार्ड खोला गया है। डेंगू केस सामने न आने के बाद फिलहाल यहां सामान्य महिला मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। इसी प्रकार जिला अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड के पास डेंगू वार्ड बनाया गया है। बीएमसी में एक साथ 30 मरीजों को भर्ती करने की सुविध्ाा है। मेडिसिन विभाग के अधिकारियों को डेंगू वार्ड की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जिला अस्पताल में मैकएलाइजा जांच होगी

डेंगू के मामले में मैकएलाइजा जांच को अधिकृत माना जाता है। मैकएलाइजा जांच की सुविध्ाा केवल जिला अस्पताल में उपलब्ध है। इसके अलावा बीएमसी सहित जिलेभर में सरकारी और निजी तौर पर आरडी किट से जांच की सुविधा उपलब्ध है।

इमरजेंसी वार्ड को बनाएंगे स्वाइन फ्लू वार्ड

बीएमसी में सर्जरी विभाग के बाजू में बंद पड़े इमरजेंसी वार्ड को स्वाइन फ्लू वार्ड बनाया जा रहा है। पिछले सालों में सागर में दर्जनों की तादाद में स्वाइन फ्लू संक्रमण के केस सामने आ चुके हैं। आधा दर्जन मरीजों की मौत भी स्वाइन फ्लू के संक्रमण से हो चुकी है। इस कारण जिले में स्वाइन फ्लू के इलाज की व्यवस्था की जा रही है। हालांकि स्वाइन फ्लू के मामले में स्वाब की जांच के लिए सैंपल जबलपुर भेजे जाते हैं।

आठ साल बाद रिपीट हो रहा चिकनगुनिया

जिले में करीब आठ साल पहले चिकनगुनिया का आउटब्रेक हुआ था। उसके बाद बीच के सालों में नया केस नहीं मिला। पिछले दो साल से फिर चिकनगुनिया के केस सामने आने लगे हैं। बीते दिनों मकरोनिया इलाके में हैपेटाइटिस से दर्जनभर लोगों की मौत होने के बाद जबलपुर के आरएमआरसी लैब में जांच के दौरान एक मरीज को चिकनगुनिया का संक्रमण निकल चुका है।

क्या है डेंगू, कैसे बचें

डेंगू और चिकनगुनिया एडीज प्रजाति की मादा मच्छर के काटने से फैलता है। एडीज मच्छर को पहचानना काफी आसान है। इसके शरीर पर सफेद रंग की धारियां बनी होती हैं। यह मच्छर साफ पानी में अंडे देता है इसलिए कहीं भी पानी का भराव न होने दें। डेंगू के संक्रमण से ठंड लगकर तेज बुखार, सिर व मांसपेशियों में तेज दर्द, आंखों को दबाने या हिलाने से दर्द और बढ़ जाता है। बहुत ज्यादा कमजोरी, भूख न लगना। इसके अलावा सबसे प्रमुख लक्षण शरीर में लाल-लाल रेशे उभरने लगते हैं। खासतौर से गर्दन, छाती, चेहरे, पीठ में लाल या गुलाबी रंग के निशान दिखने लगते हैं।

जिले के सभी ब्लॉकों को अलर्ट पर रखा

डेंगू के मामले में अभी तक कहीं से भी मरीज सामने नहीं आए हैं। पिछले सालों में डेंगू आउटब्रेक को देखते हुए पहले ही अलर्ट जारी कर दिया गया था। सभी ब्लॉकों में लार्वा सर्वे कराया जा रहा है। जांच की सुविधा व दवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित कराई गई है। डेंगू, चिकनगुनिया सहित स्वाइन फ्लू को लेकर हम पहले से ही सतर्क हैं।

-डॉ. इंद्राज सिंह ठाकुर, सीएमएचओ

डेंगू वार्ड बनाया गया है

डेंगू के मामले में सागर जिला पहले से संवेदनशील रहा है। शासन से आदेश आने के बाद बीएमसी में अलग से डेंगू वार्ड बनाया गया है। संदिग्ध मरीजों की जांच व इलाज की पूरी व्यवस्था है। स्वाइन फ्लू वार्ड भी हम बना रहे हैं। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। मच्छरों के कारण डेंगू और चिकनगुनिया होता है। तबियत बिगड़ने पर लोग मरीज को जल्द अस्पताल लेकर आएं।

-डॉ. जीएस पटेल, डीन, बीएमसी

Leave a Reply

Back to top button