katni

चंदाखोरी के लिए शहर में बदनाम हुआ युवा मोर्चा!

कटनी। कटनी का भारतीय जनता युवा मोर्चा चंदाखोरी के लिए इस कदर बदनाम हो चुका है कि इसकी आंच पार्टी के मुख्य संगठन पर भी आ रही है। युवा मोर्चा का प्रदेश से मिलने वाला कोई कार्यक्रम शहर में बगैर चंदावसूली के नहीं हो रहा।

पिछले दिनों एक रेत ठेकेदार से खुलेआम वसूली का आडियो वायरल होने के बाद संगठन में हड़कंप मचा था, इसके बावजूद पार्टी के जिम्मेदार लोगों ने युवा मोर्चा के पदों पर जमे लोगों को लगता है कोई ताकीद नहीं दी। आलम यह है कि एन विधानसभा चुनाव के वक्त पार्टी की रीढ़ कहे जाने वाले युवा मोर्चा की हालत पतली है। शहर में वैसे भी युवाओं की कोई टीम युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष के साथ नहीं उस पर भी चंदाखोरी जैसे आरोप संगठन की फजीहत कराने के लिए काफी हैं।

ताजा मामला युवा संकल्प रैली का है। बताया जा रहा है कि प्रदेश संगठन से मिले इस कार्यक्रम को अमलीजामा पहनाने के लिए एक बार फिर युवा मोर्चा की वसूली सेना शहर में सक्रिय हो चुकी है। शासकीय विभागों से लेकर ठेकेदारों तक किसी को नहीं बख्शा जा रहा।

इसके पहले सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता और प्रदेश युवा मोर्चा अध्यक्ष अभिलाष पांडे के स्वागत के कार्यक्रमों में वसूली को लेकर भी युवा मोर्चा का जिला संगठन निशाने पर रहा है।

आजीवन सहयोग निधि की रसीदें कटवाने को लेकर एक रेत ठेकेदार से हुआ विवाद जब सार्वजनिक हुआ था तब भी संगठन स्तर पर युवा मोर्चा की पर्याप्त छीछालेदर हो चुकी है। इसके बावजूद लगता है कि भारतीय जनता पार्टी के जिम्मेदार लोगों ने अपनी युवा टीम के कारनामों से सबक नहीं लिया। यदि समय रहते इन कृत्यों पर अंकुश नहीं लगाया गया तो शहर में पार्टी की छवि को बट्टा लगने में देर नहीं लगेगी।
संगठन कमजोर, युवाओं का भरोसा नहीं
कटनी में वैसे भी युवा मोर्चा संगठन बेहद कमजोर है। मौजूदा जिलाध्यक्ष अखिलेश पांडेय के साथ शहर के युवाओं की टीम भी नजर नहीं आती। उनकी टीम में शहर में प्रभाव रखने वाले युवा नेताओं की कमी साफ तौर पर महसूस की जा सकी है। शहर में पकड़ रखने वाले युवाओं की टीम न होने के कारण युवा मोर्चा आम जनता से जुड़ नहीं पा रहा। ऐसे में पार्टी के जो उद्देश्य हैं वे पूरे नहीं हो पा रहे।

प्रदेश अध्यक्ष अभिलाष पाण्डेय ने जिस भरोसे के साथ युवा मोर्चा की कमान कटनी में अखिलेश पाण्डेय को सौंपी थी, उस पर किसी भी सूरत में वे खरे नहीं उतर रहे। युवा मोर्चा के नेता साफ-तौर पर कहते सुने जा रहे हैं कि इससे बेहतर कार्यकाल तो पूर्व अध्यक्ष मनीष दुबे का था। उनके साथ शहर में पकड़ रखने वाले युवाओं की टीम थी और बेहतर छवि के साथ युवा मोर्चा मैदानी स्तर पर सक्रिय था।

कमजोर संगठन से कैसे होगा चुनाव
नवम्बर में विधानसभा चुनाव होना है लेकिन कटनी जिले में हाल यह है कि मैदानी स्तर पर काम करने के लिए युवाओं की टीम मजबूत नहीं हैं। शासन की योजनाओं की जानकारी घर-घर पहुंचाने और फील्ड पर पार्टी का माहौल तैयार करने की जिम्मेदारी युवा मोर्चा की होती है, लेकिन कटनी में युवा मोर्चा की मौजूदा हालत देखकर ऐसा नहीं लगता कि पार्टी का यह महत्वपूर्ण मोर्चा विधानसभा चुनाव में अपनी कारगर उपस्थिति दर्ज करा पाएगा। संगठन के पदाधिकारियों का पूरा ध्यान जब केवल वसूली पर हो तब ऐसे में पार्टी के कार्यक्रमों के जरिए आम जनता को संगठन से जोड़ने के उद्देश्य कैसे पूरे हो पाएंगे।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

Leave a Reply