क्या वाकई उत्तर कोरिया में नहीं फैला कोरोना वायरस, जानें क्या है सच्चाई

दुनिया भर में कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमितों की संख्या 10,30,000 को पार कर गई है. चीन से निकलने के बाद सबसे पहले चपेट में आने वाले देशों में सिंगापुर, हांगकांग, स्पेन और दक्षिण कोरिया शामिल थे. दक्षिण कोरिया (S. Korea) में अब तक संक्रमितों की संख्या 10,062 हो गई है. इनमें 174 लोगों की मौत हो चुकी है. इसके उलट दक्षिण कोरिया का पड़ोसी उत्तर कोरिया (North Korea) अब तक इसी दावे पर अड़ा है कि देश में संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है. उत्तर कोरिया का सरकारी मीडिया कह रहा है कि देश में संक्रमण को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए थे. इसी का नतीजा है कि उत्तर कोरिया पूरी तरह कोरोना वायरस से मुक्त है. इसीलिए देश के सुप्रीम नेता किम जोंग उन सार्वजनिक स्थानों पर बिना फेस मास्क लगाए बेझिझक घूम रहे हैं
उत्तर कोरिया से एकदम उलट है उनके मीडिया का दावा
उत्तर कोरिया के मीडिया की कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के एक प्रांत में ही 2,600 से ज्यादा कोरोना पॉजिटिव केस हैं. उत्तर कोरिया की आलोचक वेबसाइट द डेली एनके के मुताबिक, ऐसी रिपोर्ट्स हैं, जिनमें बताया गया है कि उत्तर कोरिया में संक्रमित या उनके संपर्क में आए लोगों को अनिश्चितकाल के लिए एकांत में रखा जा रहा है. वेबसाइट ने उत्तर कोरिया के आधिकारिक अखबार रोडोंग सिनमन की रिपोर्ट का हवाला दिया है. रिपोर्ट में चागांग प्रांत में ही 2,630 लोगों को एकांत में रखे जाने का जिक्र है. हालांकि, उत्तर कोरिया पहले ही दुनिया से अलग-थलग है. अपने परमाणु कार्यक्रम के चलते उस पर कई तरह के प्रतिबंध हैं. हालांकि, उसका दावा है कि कोरोना को लेकर उसने पहले ही काफी सक्रियता दिखाई है. उसने जनवरी में चीन में कोरोना वायरस के पहले मामले सामने आते ही अपनी सीमाएं बंद कर दी थीं.
उत्तर कोरिया का कहना है कि उसने जनवरी में ही कोरोना वायरस से बचाव के लिए विदेशी पर्यटकों पर पाबंदी लगा दी थी.
उत्तर कोरिया का दावा, पहले ही उठा लिए थे ठोस कदम
उत्तर कोरिया में महामारी विरोधी विभाग के निदेशक पाक म्योंग सू का कहना है कि कोरोना वायरस को देश में आने से रोकने के उनके प्रयास कामयाब रहे हैं. उन्होंने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि हमारे देश में अब तक एक भी व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं हुआ है. इसके लिए हमने एतहियाती और वैज्ञानिक कदम उठाए हैं. हमने अपने देश में आने वाले सभी लोगों की पूरी निगरानी की है. उन्हें आम लोगों में घुलने-मिलने से पहले क्वारंटीन किया गया. बाहर से आने वाले हर सामान को अच्छी तरह से डिसइंफेक्ट किया गया. सीमाएं बंद करने के साथ्ज्ञ ही हवाई और जल मार्ग रोक दिया गया. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया की लचर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के कारण वायरस की चपेट में आने का खतरा ज्यादा था. इसके अलावा उत्तर कोरिया को छोड़ चुके बागियों का कहना है कि देश की तानाशाह सरकार संक्रमण के मामलों को छिपा रही है.
अमेरिका का दावा, उत्तर कोरिया में हैं संक्रमण के मामले
उत्तर कोरिया की सरकारी प्रेस भी लोगों को संक्रमण से बचाव के उपायों के बारे में नियमित जानकारी दे रही है. लोगों से कहा जा रहा है कि मास्क को ड्यूटी समझकर पहनें. घर के मेनगेट के हैंडल को सैनेटाइज करें. इसके अलावा प्रशासन सार्वजनिक वाहनों को संकमण मुक्त बनाए रखने के लिए सैनेटाइजेशन करा रहा है. कस्टम अधिकारी बंदरगाहों पर विदेश से आए कंटेनर्स को 10 दिन तक अलग जगह पर रख रहे हैं. हालांकि, उत्तर कोरिया के इन कदमों के बावजूद ये यकीन करना मुश्किल है कि चीन के पड़ोसी देश में संक्रमण एक भी मामला नहीं है. अमेरिका दावा कर रहा है कि उत्तर कोरिया में कोरोना वायरस के मामले हैं. दक्षिण कोरिया में तैनात शीर्ष अमेरिकी सैन्य कमांडर जनरल रॉबर्ट अबराम्स ने 13 मार्च को कहा था कि उत्तर कोरिया की सेनाएं करीब 30 दिन से लॉकडाउन में थीं. हाल में उन्होंने फिर अभ्यास शुरू कर दिया है. इसके अलावा 13 मार्च से पहले के 24 दिनों में उत्तर कोरिया में एक भी हवाई जहाज नहीं उड़ा.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2018 में वायरस से सफलतापूर्वक लड़ने को लेकर उत्तर कोरिया की तारीफ की थी.
लोगों का मरना उत्तर कोरिया के लिए नहीं है कोई मुद्दा
उत्तर कोरिया पहले भी यह साबित कर चुका है कि वह किसी वायरस से अकेले ही निपटने में सक्षम है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2018 में वायरस से सफलतापूर्वक लड़ने को लेकर उत्तर कोरिया की तारीफ भी की थी. वहीं, कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अगर उत्तर कोरिया में संक्रमण फैला होता तो किम जोंग उन तानाशाही अंदाज में संक्रमित और संदिग्धों को किसी अलग जगह भेज देते. इसके अलावा वह संक्रमित इलाकों को पूरी तरह बंद कर कोई भी जानकारी बाहर निकलने पर रोक लगा देते. बता दें कि 1990 में अकाल के दौरान उत्तर कोरिया में 2 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. तब भी यहां की सरकार ने सब कुछ अपने नियंत्रण में रखा था. ऐसे में अगर वहां वायरस से मौतें होती भी हैं तो किम पर कोई फर्क नहीं पडेगा. कोरिया सोसायटी के अध्यक्ष थॉमस बर्नी ने कहा कि वहां मानवाधिकार या सामाजिक स्वतंत्रता जैसा कोई मुद्दा ही नहीं है. भूख से मरते लोग भी वहां समस्या नहीं है. वे बड़े आराम से लोगों को जबरदस्ती कई महीनों तक अलग-थलग रख सकते हैं.
उत्तर कोरिया की 40 फीसदी आबादी है कुपोषित
उत्तर कोरिया की एक पूर्व डॉक्टर चोई जुंग हुन के मुताबिक, उत्तर कोरिया में संक्रमण के कारण बहुत सी मौतें हुई हैं. वह 2012 में दक्षिण कोरिया में बस गई थीं. आर्थिक प्रतिबंधों और खराब मेडिकल व्यवस्था की वजह से उत्तर कोरिया की 40 फीसदी आबादी कुपोषण का शिकार है. ऐसे में बीमारियां बड़ी आसानी से इन्हें अपना शिकार बना सकती हैं. दक्षिण कोरिया से लगी सीमा पर भारी-भरकम सैन्य मौजूदगी की वजह से उत्तर कोरिया में कोरोना वायरस की एंट्री की भले ही कम संभावनाएं हैं लेकिन चीन के साथ उत्तर कोरिया की 1420 किमी लंबी सीमा से यहां कोरोना वायरस फैल सकता है. बता दें कि चीन-उत्तर कोरिया बॉर्डर सालों से कारोबारियों के लिए ब्लैक मार्केटिंग का जरिया रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, उत्तर कोरिया से लगे दो चीनी प्रांत लियानिंग और जिलिन में संक्रमण के सैकडों मामले सामने आए हैं.








