क्या पूर्व महापौर हों गे नए नगर अध्यक्ष?
जबलपुर नगर प्रतिनिधि।
विधानसभा चुनाव की हार के बाद भाजपा पार्टी में लगातार मंथन जारी है पार्टी में टिकट वितरण से लेकर हार के बाद शहर में संगठन मंत्री की कमी नजर आई थी जिसके उपरांत कुछ दिन पूर्व सह संगठन मंत्री एवं संगठन मंत्री शहर के कार्यालय पहुंचे तथा हार के मंथन को लेकर शहर के सभी नेताओं से बात की गई।
पूर्व महापौर से मिले संगठन मंत्री
चर्चाओं का दौर गरम है जिसमें की सबसे महत्वपूर्ण बात सामने आ रही है पूर्व महापौर प्रभात साहू से सहसंगठन मंत्री द्वारा 1 घंटे तक चर्चा की गई तथा दूसरे दिन संगठन मंत्री द्वारा चर्चा की गई है प्रदेश अध्यक्ष भी प्रभात साहू जी से लगातार संपर्क में बने हुए हैं जिससे कि अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि आने वाले वक्त में भाजपा के नगर संगठन में एक बड़ा बदलाव दिख सकता है
सभी को एक साथ लेकर चलने की क्षमता
पूर्व महापौर प्रभात साहू की राजनीतिक कुशलता ही है जिसमें कार्यकर्ताओं के मध्य समन्वय व्यवहार की भावना बनाकर संगठन को आगे ले जाने की क्षमता है सभी कार्यकर्ताओं के चहेते और महापौर के कार्यकाल में संगठन में अपना मैनेजमेंट बना कर रखा था । उनका यही राजनीतिक व्यवहार संगठन के संज्ञान में हैं जिसके चलते संगठन को भी ऐसे ही व्यक्ति की तलाश है जो नगर अध्यक्ष बनकर लोकसभा चुनाव में कार्यकर्ताओं के मध्य हो रहे आपसी मतभेद को भुलाकर संगठन में विजेता की भूमिका का निर्वाहन कर सके।
बड़े नेताओं की की गई थी अनदेखी
ज्ञात हो विधानसभा चुनाव के दौरान कुछ बड़े नेताओं की संगठन द्वारा अनदेखी की गई फल स्वरूप संगठन का मैनेजमेंट इस प्रकार से कार्य नहीं कर पाया जिस प्रकार से 2013 के चुनाव में भाजपा के संगठन ने कार्य किया था सभी नेताओं के समन्वय के साथ ही भाजपा की जीत सुनिश्चित हुई थी।
नगर अध्यक्ष का फोकस था सिर्फ पश्चिम विधानसभा
सूत्रों के अनुसार भाजपा के नगर अध्यक्ष जी एस ठाकुर और कुछ मंडल अध्यक्ष सिर्फ चुनाव के वक्त पश्चिम विधानसभा में ही वक्त गुजारने में लगे हुए थे अन्य विधानसभाओं में इनका ध्यान ही नहीं था जिसके चलते शहर में उत्तर मध्य विधानसभा, पूर्व विधानसभा से नगर संगठन को हाथ धोना पड़ा। जिस विधानसभा में सबसे ज्यादा समय संगठन में गुजारा उस विधानसभा में भी भाजपा पार्टी हार गई। जिसके चलते संगठन नगर अध्यक्ष से नाराज हैं।
नगर अध्यक्ष का कार्यकाल भी हो गया है पूरा
जैसा कि नगर अध्यक्ष का कार्यकाल 3 साल का होता है और जी एस ठाकुर के 3 साल हो चुके हैं परंतु कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि जीएस ठाकुर लोकसभा चुनाव तक नगर अध्यक्ष बने रहना चाहते हैं परंतु संगठन विधानसभा की हारने के बाद लोकसभा चुनावों के लिए कहीं भी रिस्क नहीं लेना चाह रहा
लोकसभा चुनाव के पहले विभीषणों पर हो सकती है कार्यवाही
लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर संगठन मंत्री वसह संगठन मंत्रियों मोर्चा संभाल लिया है।विधानसभा प्रत्याशियों को गुरुवारको अलग-अलग मुलाकात हुई। हर किसी ने हार का दुखड़ा रोया। इस पर पार्टी भी हार में अहम भूमिका निभाने वाले किरदारों पर एक्शन मोड में नजर आ रही है।
शरद जैन पार्टी कार्यालय रानीताल में संगठन मंत्री व सह संगठन मंत्री से मिलने गए। शाम को पश्चिम से प्रत्याशी रहे हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू और अंचल सोनकर भी मिले। बताया जाता है कि सभी ने भितरघात की अहम वजह हार के लिए बताई। विधायकों ने कहा कि उनके क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं ने विरोधियों के पक्ष में काम किया।
प्रत्याशी भी इन मंडलों के खिलाफ खुलकर बोल चुके हैं। ऐसे में पार्टी लोकसभा चुनाव के पहले बड़ी सर्जरी करने का प्रयास कर रही है। बताया जा रहा है कि प्रदेश संगठन मंत्री सुहास भगत से संगठन इस संबंध में बातचीत करने के बाद एक्शन लेगा।

